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इंटरव्यूः मुस्लिम समाज दस नेता तैयार करने के बजाय एक IAS – IPS पैदा करे- फहरीन युनुस शैख

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आज जब देश में साम्प्रदायिक सद्भाव पर खतरा मंडरा रहा है वंही मुस्लिम महासभा जैसे संगठन देश मे अमन-चैन, भाईचारा एवं कौमी एकता के लिए दिनरात मेहनत कर रहें है। उन्हीं में से एक हैं मुस्लिम महासभा की राष्ट्रीय प्रमुख फहरीन युनुस, जिनसे हमारे संवादाता शरीफ मोहम्मद खिलजी ने मुस्लिम महासभा, भारतीय मुसलमान और देश की सामाजिक, आर्थिक हालात सहित विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की प्रस्तुत है बात चीत के प्रमुख अंश।

सवाल – सबसे पहले तो मैडम आपका स्वागत है। आप अपने बारे में थोडा बताइए?

जवाब – मैं फहरीन युनुश शैख गांधीनगर  उदयपुर निवासी हूँ। मैं मुस्लिम महासभा की राष्ट्रीय प्रमुख हूँ। मेरे शोहर मरहूम मोहम्मद युनुश शैख ने मुस्लिम महासभा की स्थापना की थी। उनके इंतकाल के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान और राष्ट्रीय कौर कमेटी की सहमति से मुझे राष्ट्रीय प्रमुख की जिम्मेवारी सौंपी गई जिसे मैं तन- मन-धन से निभा रही हूँ।

सवाल – आप एक राष्ट्रव्यापी संगठन की प्रमुख है। समाज सेवा के लिए आपका प्रेरणास्रोत कौन है?

जवाब – मेरा प्रेरणास्रोत मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख है।मैं एक घरेलू महिला थी वैसे आज भी घरेलू महिला हूँ।मैनें मेरे शोहर को समाज और कौम के लिए लडते हुए देखा है। उनके अधुरे सपनों को पूरा करना मेरा लक्ष्य है।

सवाल – मुस्लिम महासभा की आप सबसे बड़ी नेता है। आपका संगठन राष्ट्रव्यापी है। आप कार्यकर्ता, पदाधिकारियों की शिकायतें, समस्याओं को किस प्रकार लेते है।

जवाब – मुस्लिम महासभा मेरा परिवार है। मैं महासभा परिवार की सदस्य हूँ। मेरे शोहर मरहूम मोहम्मद युनुश शैख से मैंने काफी कुछ सीखा है।मेरे शोहर अपनी अंतिम सांस तक महासभा के लिए फ्रिकमंद थे। मेरे शोहर से मेरा भी वादा था  कि मैं अपनी अंतिम सांस तक अपनी कौम, समाज और महासभा के लिए काम करूंगी। महासभा परिवार की प्रमुख होने के नाते सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी मेरे स्वयं के परिवार के सदस्य है।महासभा के सभी पदाधिकारी काफी जिम्मेवार है। सभी पदाधिकारी तन – मन-धन से खिदमत ए खल्क मे लगे रहते है।

सवाल – मुस्लिम महासभा के सफर के बारे में कुछ बताएं?

जवाब – मुस्लिम महासभा की स्थापना मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख द्वारा मेवाड मुस्लिम महासभा संस्थान के नाम से 2007 में की गई थी। 16 नवम्बर 2008 में मेवाड़ (उदयपुर) में महापंचायत हुई जिसमें हजारों की संख्या में मेवाड़ के मुसलमानों ने शामिल होकर एकता-अंखडता की बेमिसाल नजीर पेश की। महासभा की कामयाबी को देखते हुए राजस्थान के दुसरे इलाकों के मुसलमानों ने भी जुडने की इच्छा जाहिर की। मेवाड़ मुस्लिम महासभा अब राजस्थान मुस्लिम महासभा बन चुकी थी। 2014-2015 में महासभा ने राजस्थान के बाहर अन्य प्रदेशों में कदम रखा। संगठन राष्ट्रव्यापी बना। पहले संगठन मेवाड मुस्लिम महासभा उदयपुर संभाग तक था, बाद में मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद के नेतृत्व में संगठन राष्ट्रव्यापी बना जिसका अब कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारत है। 2007-08 से लेकर अब तक मेवाड मुस्लिम महासभा से लेकर मुस्लिम महासभा के सफर में कई आन्दोलन, महापंचायत, महासम्मेलन हुए। देश और कौम की खिदमत का ये सिलसिला लगातार जारी है।

सवाल – आप इतने बड़े संगठन की राष्ट्रीय प्रमुख है। बहुत बार दिक्कतों का सामना करना पडता होगा?

जवाब – मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख साहेब ने मेरे अंदर कौम की खिदमत का जज्बा पैदा किया। हॉ, बहुत सी दिक्कतें भी होती है। मेरे  बच्चे अभी छोटे है। लेकिन मैनैं मेरे शोहर को कौम और समाज के लिए लडते देखा है। उन्होंने भी हर बाधा को पार किया।जो छोटी मोटी दिक्कत होती है मेरे शोहर ने  मुझे पहले से ही आगाह किया था। वो कहते थे फहरीन तुम्हें ये सब दिक्कतें होगी, उन्होनें मुझे बाधाओं से लडना सिखाया। मेरे शोहर मेरे लिए प्रेरणास्रोत के साथ ऊर्जा स्त्रोत भी है।

सवाल – आपके शोहर मरहूम युनूश शैख साहेब का काफी कम उम्र इंतकाल हो गया। आप  परिवार और महासभा के बीच कैसे संतुलन बना कर रखते है?

जवाब – मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख का मात्र 43 वर्ष की उम्र में 22 जनवरी 2017 को इंतकाल हो गया। उन्हें लीवर की गंभीर समस्या थी। महासभा के सदस्य भी मेरे परिवार का हिस्सा है। मेरे शोहर महासभा की कमान मेरे बड़े भाई राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद को सौंप कर गए थे।शैख साहेब ने कौमपरस्तों की एक बड़ी फौज तैयार की। महासभा के वफादारों की एक कौर कमेटी का भी निर्माण किया और महासभा और कौर कमेटी की कमान मेरे बड़े भाई ईमरान खान गाजियाबाद को सौंपी। आज महासभा हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान के नेतृत्व में देश में अमन – चैन, भाईचारा एवं कौमी एकता को मजबूत कर रही है।

सवाल – कई बार विवाद की स्थिति आई है। आप इसके बारे में स्पष्ट करें?

जवाब – जब मेरे शोहर ने मुस्लिम महासभा संगठन की स्थापना 2007-08 में की थी तब उसे मेवाड़ मुस्लिम महासभा नाम से जाना जाता था जिसका कार्यक्षेत्र राजस्थान का उदयपुर संभाग था जिसका रजि. क्रमांक मुस्लिम महासभा संस्थान 201(2007-08) था। 2015 में संगठन राष्ट्रव्यापी बना तब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान ने  सम्पूर्ण भारत के लिए महासभा का रजिस्ट्रेशन करवाया जिसका रजिस्ट्रेशन क्रमांक 391 है। मेरे शोहर ने महासभा के लिए एक राष्ट्रीय कौर कमेटी की स्थापना की जिसकी कमान हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान को सौंपी।

रही बात विवाद की मेरे शोहर के वक्त भी इन लोगों ने महासभा को तोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किये। मेरे शोहर पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए गए। उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा, उनकी तबियत खराब रहने लग गई। आज भी ये लोग अपनी हर कोशिश कर रहे है। इन लोगों के इतिहास से मेरा पूरा उदयपुर शहर वाफिक है। मेरे शोहर ने मुझे असत्य, बुराई और हिंसा से लडना सिखाया है। आज भी मेरे शोहर  शैख साहेब को चाहने वाले हजारों लोगों की फौज मेरे साथ है, वैसै भी मैनैं अपने शोहर को इन विवादों से लडते देखते हुए खुद को तैयार कर लिया है। और मैं फहरीन युनुश शैख पत्नी मरहूम युनूश शैख(संस्थापक मुस्लिम महासभा) आपके माध्यम से स्पष्ट करना चाहती हू मुस्लिम महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद है। उनके नेतृत्व में महासभा कौम और देश में खिदमत ए खल्क को अंजाम दे रही है।

सवाल – मुस्लिम महासभा का मुख्य मिशन क्या है?

जवाब – मुस्लिम महासभा फोरटी के मिशन पर काम करती है। तालीम – तंजीम – तिजारत-तरक्की महासभा का मुख्य उद्देश्य है।देश में कौमी एकता और भाईचारे को बढाना, देश के मुसलमानों को एक जाजम पर लाना, मुसलमानों की सामाजिक – आर्थिक मजबूती के लिए काम करना, रंगनाथ मिश्रा आयोग एवं सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाना, मुसलमानों को आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग ये सब मुस्लिम महासभा का मिशन है।

सवाल – आप देश के मुसलमानों की वर्तमान हालात के लिए किसे जिम्मेदार मानते है?

जवाब – देखिए सभी राजनैतिक दलों ने मुसलमानों का यूज किया। आज भी सभी दल मुसलमानों का यूज कर रहे हैं। सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग, कुंडु आयोग की रिपोर्ट सामने है। देश में मुसलमानों की हालात दलितों से भी बदतर है। मुसलामन शैक्षणिक। सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक रूप से बिल्कुल हाशिए पर है।मुसलमानों की वर्तमान हालात के लिए सभी राजनैतिक दल जिम्मेदार है।

सवाल – मुसलमानों की हालात को कैसे सुधारा जा सकता है?

जवाब – देखिए, शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो कौम की हालात को सुधार सकता है। मेरा मानना है समाज में दस नेता पैदा करने से बेहतर एक आईएएस – आईपीएस अधिकारी पैदा करना है। केन्द्र सरकार को रंगनाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करना चाहिए। धारा – 341 में लगे धार्मिक प्रतिंबध को तत्काल प्रभाव से हटाना चाहिए। मुसलमानों के लिए भी आबादी के हिसाब से आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए। मुस्लिम बहुल्य क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों की स्थापना करनी चाहिए। जेलों में बंद बेगुनाह मुसलमानों को तत्काल प्रभाव से छोडना चाहिए। और आम मुसलमान को भी ये बात समझनी चाहिए कि सिर्फ तालिम ही कौम का उद्धार कर सकती है इसलिए जरूरी है कि मुसलमान आधा रोटी खाए लेकिन अपने बच्चों को जरुर पढांए।

सवाल – मुसलमानों में पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण किसे मानते है? मुसलमानों में बालिका शिक्षा का आंकड़ा भी चिंताजनक है?

जवाब – देखिए मुसलमानों के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण शिक्षा है। मुसलमानों की शैक्षणिक हालात चिंताजनक है। रही बात बालिका शिक्षा कि बालिका शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। मुसलमानों में बालिका शिक्षा के आंकड़े बहुत ही चिंताजनक है। आम मुसलमान को ये बात समझनी चाहिए जब एक बेटी पढती है तो वो दो घरों में शिक्षा का उजाला होता है। एक तो उसके मॉ-बाप का घर और दुसरा उसका शोहर का घर।इसलिए बेटियों को तो हर हाल में उच्च शिक्षा दिलवानी चाहिए।

सवाल – आज देश में भीड़ द्वारा लोकतंत्र को लगातार खोखला किया जा रहा है। इसके बारे में आपका क्या कहना है?

जवाब – देखिए आज देश की साम्प्रदायिक सद्भाव और कौमी एकता पर खतरा है। बेकसूर मुसलमानों को गाय के नाम पर, बच्चा चोरी के नाम पर भीड़ लगातार शीकार कर रही है। कंही ना कंही केन्द्र और राज्य सरकारों का भी इन उपद्रवी तत्वों को संरक्षण प्राप्त है। आज गाय का नाम भी मुसलमान के लिए एके-47 को गया है। केन्द्र और राज्य सरकार इस मामले में पूर्णतः फैल है। मीडिया भी मुस्लिम मुद्दों पर चुप्पी साध लेता है।हमारी लगातार मांग है गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित किया जाए। हमनें राजस्थान विधानसभा के घेराव से लेकर जन्तर – मन्तर दिल्ली में धरना भी दिया है। भीडतंत्र को सिर्फ शख्त कानून ही रोक सकता है, इसके लिए जरूरी है भीडतंत्र पर रासुका लगे। राज्य सरकारें भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को माने।

सवाल – मुस्लिम महासभा की टीम ब्लड डोनेशन मे काफी आगे है। आपका क्या कहना है?

जवाब – हाँ, मुस्लिम महासभा परिवार के सदस्य हर साल हजारों युनिट ब्लड डोनेट करते है।रक्तदान महादान होता है। मुस्लिम महासभा के संस्थापक मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख साहेब के यौमे पैदाइश दिवस 31 दिसंबर को देशभर में सैकड़ों रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते है।ब्लड डोनेशन के अलावा हर प्राकृतिक आपदा के समय  और साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए मुस्लिम महासभा परिवार के सदस्य हर वक्त तैयार रहते है। चाहें अभी केरल में आई भीषण बाढ़ हो, चाहे बांसवाड़ा में हुई साम्प्रदायिक तनाव की घटना हो या गाजियाबाद (यूपी) के हज हाउस पर तालाबंदी का मामला हो।मुस्लिम महासभा परिवार के सदस्य हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान के नेतृत्व में हर वक्त कौमी खिदमत को अंजाम देते है।

सवाल – मुस्लिम महासभा आगे किन विषयों पर फोकस करेगी?

जवाब – आज मुसलमानों की शैक्षणिक हालात बहुत खराब है। मुस्लिम महासभा हर साल राजस्थान में मुस्लिम प्रतिभावान छात्रों के लिए प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करती है। आगे हमारी कोशिश रहेगी राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम प्रतिभाओं को हर साल सम्मानित किया जाए। साथ ही महासभा की कोशिश रहेगी मुस्लिम बहुल्य क्षेत्रों में अधिकाधिक शैक्षणिक संस्थान खोली जाए। महासभा हर साल हकीम खॉ सूरी शहादत दिवस, वीर अब्दुल हमीद शहादत दिवस पर साम्प्रदायिक सौहार्द और सद्भाव के लिए कार्यक्रम आयोजित करती है। हमारी कोशिश रहेगी देश में कौमी एकता, साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द को मजबूत करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाए।

सवाल – आज देश के सामने मुख्य चुनौतियां क्या है?

जवाब – आज देश के लोकतंत्र पर भीडतंत्र हावी हो रहा है। भीडतंत्र से देश के संविधान और लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है। भीडतंत्र पर रासुका जैसे कानून बहुत जरुरी है। देश में साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द को खतरा है। असहिष्णुता का माहौल बढा है।इसलिए जरूरी है असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्यवाही की जांए। आज देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, मंहगाई जैसी समस्याएं मुंह खोले खडी है लेकिन सरकार और दोगली मीडिया ने जनता को हिंदू और मुसलमानों में उलझा के रखा हुआ है।आज मीडिया भी निष्पक्ष नही रही। कानूनी मामलों में भी फेअर इन्वेस्टिगेशन नहीं हो पाता। मीडिया की निष्पक्षता और कानून की सुदृढ़ता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।