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विशेष: नीतीश कुमार और भाजपा सरकार में अपराधियो का गढ़ बन गया बिहार, तीन महीने में हुए 2288 दंगे और 667 हत्याएं

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नई दिल्ली – बिहार की राजनीती में इन दिनों राजनीतिक पारा उफान पर है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंध (राजग) के घटक दलों में आम चुनाव 2019 के मद्देनजर अधिक से अधिक सीटों पर दावा करने की होड़ मची है। इसी बीच बिहार में अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर उठता जा रहा है। सुशासन का खौफ अपराधियों में लगभग खत्म हो गया है।

इसी बीच बिहार में महागठबंधन तोड़कर सत्ता में आई नीतीश और भाजपा की संयुक्त सरकार में होने वाले अपराधों के आंकड़े सामने आए हैं। ये आंकड़े बता रहे हैं कि बिहार की मौजूदा सरकार में ही लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद के साथ गठबंधन के मुकाबले भाजपा से गठबंधन करने के बाद अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।

बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस साल के शुरुआती तीन महीनों में कुल 57 हजार 441 संगीन अपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें अपह्रण के 2171, हत्या के 667, बलात्कार के 289, लूट डकैती के 71, चोरी के 7172 और सांप्रदायिक दंगा के 2288 मामले दर्ज हुए हैं।

जानकारी के लिये बता दें कि बीते साल जुलाई के आखिरी सप्ताह में नीतीश कुमार ने अपने तत्कालीन सहोयगी दल राजद और कांग्रेस के महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बना ली थी। इन आंकड़ों को मुताबिक तब से बिहार में अपराधियों का बोलबाला हो गया है जिसका प्रभाव अपराध के तेजी से बढ़ते ग्राफ पर पड़ा है।

बिहार पुलिस के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2017 में जहां कुल संगीन अपराधिक मामलों की संख्या 20 हजार 96 थी लेकिन यह संख्या दिसंबर 2017 आते आते बढ़कर 20 हजार 446 हो गई। इसी प्रकार अगस्त 2017 में बिहार में कुल 236 हत्या के मामले दर्ज हुए थे जो दिसंबर 2017 आते आते 228 हो गए। बिहार में नीतीश और भाजपा की गठबंधन सरकार आते ही बलात्कार की वारदात में तेजी बढ़ोत्तरी हुई।

अगस्त 2017 में कुल बलात्कार के 102 मामले, सितंबर में बलात्कार के 118 मामले, और अक्टूबर में 113 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए। हालांकि, नवंबर-दिसंबर में बलात्कार के मामलों में कमी आई है। इसी प्रकार सांप्रदायिक दंगों, अपह्रण, चोरी, लूट के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। जानकारी के लिये बता दें कि आंकड़े इस साल के मार्च तक ही हैं।

बिहार में मार्च के महीने में दंगे के कुल 1066 मामले दर्ज किए गए थे, और उसके अगले महीने अप्रैल में रामनवमी के मौके पर बिहार के कई जिलों में दंगे भड़के थे। इन दंगों भाजपा के कई नेताओं पर दंगा भड़काने का आरोप भी लगा था। जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित चौबे पर भी भागलपुर से मिले हुए क्षेत्र में दंगा भड़काने का आरोप लगा था।