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नज़रियाः भारत ने फ्रांस को पीछे छोड़कर विश्व की छठी अर्थव्यवस्था का मुकाम हासिल किया है, क्या यह वास्तव में बहुत बड़ी बात है ?

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गिरीश मालवीय

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. उसने फ्रांस को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है लेकिन क्या यह वास्तव में बहुत बड़ी बात है ? कल इस पर बीबीसी ने विस्तृत आलेख लिखा है बीबीसी के आलेख में इस बढ़ती हुई जीडीपी की अच्छी तरह से पोल खोली गयी है।

बीबीसी लिखता है कि ‘जीडीपी किसी ख़ास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल क़ीमत है. जीडीपी को दो तरह से पेश किया जाता है क्योंकि उत्पादन की लागत महंगाई के साथ घटती-बढ़ती रहती है, एक पैमाना है कॉन्स्टैंट प्राइस और दूसरा तरीका है करेंट प्राइस. इसके तहत उत्पादन मूल्य में महंगाई दर भी शामिल होती है. मसलन अगर 2011 में देश में सिर्फ़ 100 रुपये की तीन वस्तुएं बनीं तो कुल जीडीपी हुई 300 रुपए. और 2017 तक आते-आते इस वस्तु का उत्पादन दो रह गया, लेकिन क़ीमत हो गई 150 रुपए तो नॉमिनल जीडीपी 300 रुपए हो गया लेकिन असल में हुआ क्या, भारत की तरक्की हुई या नहीं ?

यहीं बेस ईयर का फॉर्मूला काम आता है. 2011 की कॉन्स्टैंट प्राइस (100 रुपए) के हिसाब से वास्तविक जीडीपी हुई 200 रुपए. अब साफ़-साफ़ देखा जा सकता है कि जीडीपी में गिरावट आई है. भारत से फ्रांस की तुलना करना इसलिए भी बेमानी है क्योंकि भारत मे प्रतिव्यक्ति आय व्यक्ति 1,940 डॉलर है, जबकि फ्रांस की प्रतिव्यक्ति आय 38,477 डॉलर हैं यानी 20 गुना से अधिक.

 

एक ओर महत्वपूर्ण आलेख प्रसिद्ध विचारक मोहन गुरुस्वामी का सामने आया है। मोहन गुरुस्वामी लिखते हैं ‘ अर्थव्यवस्था की वृद्धि में क्षेत्रवार योगदान के आंकड़े सामने आ चुके हैं। एडमिस्ट्रेशन जिसे जाने किन वजहों से सेवाओं की श्रेणी में रखा जाता है, पिछली तिमाही के मुकाबले इस बार सात फीसदी बढ़ा है और देश में वृद्धि का सबसे बड़ा चालक बन कर उभरा है। इसका सामान्य मतलब यह हुआ कि आप जब तक सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा भुगतान करते रहेंगे, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगातार बढ़ता रहेगा। फिर एक दिन ऐसा आएगा जब आपका दम फूल जाएगा और नकद नदारद हो जाएगा। वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में लोक प्रशासन ने जीडीपी में कुल 17.3 फीसदी का योगदान दिया था। यह चौथी तिमाही में बढ़कर 22.4 फीसदी हो गया, जो कि 22.7 फीसदी का योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र से मामूली अंतर पर नीचे था।

बात यहीं नहीं रुकती। यदि आप सातवें वेतन आयोग में 23 फीसदी की वृद्धि से संतुष्ट नहीं हैं तो आगामी 15 अगस्त का इंतजार करिए। सरकारी कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस बार केंद्रीय कर्मचारियों से वित्त मंत्री के किए वादे को पूरा करते हुए वेतन आयोग की सिफारिशों के पार जाकर वेतन वृद्धि की घोषणा करेंगे’।

यानी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशे लागू होना जीडीपी के लिए संजीवनी साबित हुआ यही जीडीपी की बढोत्तरी की असली वजह है। हकीकत के धरातल पर उतर के देखा जाए तो भारत का व्यापार घाटा 2016-17 में 112.4 अरब डॉलर था जो 2017-18 में बढ़कर 160 अरब डॉलर हो गया है। मूडीज इंवेस्टर सर्विस ने इसी साल निवेश के दृष्टिकोण से भारत को अपने एशियाई समकक्षों की तुलना में सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर दिखाया है और 2018-19 में भारत की विकास दर का अनुमान 7.5 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया हैं।

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं)