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दंगे में जवान बेटा खोकर भी अमन की अपील करने वाले इमाम साहब के घर ईद के तोहफे लेकर पहुंचे इमरान

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इस्लाहुद्दीन अंसारी

नई दिल्ली – आसनसोल की मस्जिद के वो इमाम साहब तो ही होंगे आप सबको ? जिन्होंने बंगाल में नवरात्रि के दिनों में भड़की हिंसा में अपना जवान बेटा खो दिया था और जब सुबह उसकी लाश मिली तब गुस्साई भीड़ को जो उस वक़्त बदला लेने पर उतारू थी उसे ये कहकर शांत करा दिया था की किसी ने बदला लेने की बात की तो मैं ये शहर छोड़ कर चला जाऊंगा। जी हाँ वही इमाम साहब जिन्होंने नफ़रत की आग़ में जलाकर मार दिये गये अपने जवान बेटे की लाश के सामने खड़े होकर मोहब्बत और इंसानियत का ऐसा सबक़ दुनियाँ को दिया की नफ़रत वाले लोग भी सोंचने पर मजबूर हो गये।

जाने माने शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने जब रमज़ान के दिनों में लिंचिंग के शिकार परिवारों से मिलने का सिलसिला शुरू किया तब किसी ने ये नहीं सोंचा था की इमरान शहर दर शहर गांव कस्बों से होते हुए अपना मोहब्बतों का काफ़िला लिये दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर बंगाल के आसनसोल तक़ चले आएंगे। पर वो कहते है ना की जब कोई शख़्स नेकनीयती के साथ कुछ काम करने की ठानता है तब वो हदों को तोड़ते हुए फासलों का मिटाते हुए मुश्किल से मुश्किल रास्तों पर चलते हुए भी अपने काम को अंजाम तक़ ज़रूर पहुँचाता है।

ऐसे में जब लोग परदेस से अपने गांव/शहर और घरों का रुख़ कर लेते हैं की चलो रमज़ान और ईद की खुशियां माँ बाप और घर परिवार के लोगों के साथ मिल कर बांटी जाए तब ऐसे में एक अकेला इमरान लिंचिंग के शिकार परिवारों का दर्द बांटने उनकी चौखट तक़ आ पहुँचा है।


इसी सिलसिले में जुनैद पहलू और उमर के परिवार से मिलने के बाद आज बारी थी आसनसोल की मस्जिद के इमाम इमदादउल्लाह साहब के परिवार से मिलने का। जहाँ इमरान बिना किसी पूर्व सूचना के ही आसनसोल शहर में इमाम साहब से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इस मुलाक़ात का ज़िक्र और तस्वीरें साझा करते हुए इमरान ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है…..

“16 साल के जवान बेटे का जनाज़ा सामने रखा है, 15 हज़ार की भीड़ बदला लेने की बात कहती हुई दूसरे पक्ष के खिलाफ नारे लगा रही है, मौलाना इमदादउल्लाह रशीदी साहब बेटे के जनाज़े के पास खडे होकर नम ऑंखों से चीख़कर भीड से कहते हैं कि “मेरा बेटा अल्लाह की अमानत था, जिन्होंने मेरे बेटे को मारा है मैंने उन्हें माफ़ किया, मैं नहीं चाहता कि जैसे मेरा बेटा खोया है ऐसे किसी और का बेटा मारा जाये अगर आपने बदला लेने की बात की तो मैं आसनसोल शहर छोड़ कर चला जाऊँगा”

अफ़्तारी का वक्त, रोज़े की हालत में लम्बा सा सफ़र करके आसनसोल पँहुचा हूँ उन्हीं इमाम साहब से मिलने जिन्होंने अपना बेटा खोकर आसनसोल शहर को जलने से और सैकडों इंसानों को दंगे में मरने से बचा लिया !

 

28 मार्च का वो क़ातिल दिन जब रामनवमी का जुलूस निकला और देखते देखते भीड दंगाई हो गयी, स्कूल से लौट रहे इमाम साहब के बेटे को दंगाई भीड उठा ले गई और दूसरी सुबह मुश्किल से बच्चे की लाश मिली थी! सर झुकाये एक ऐसे बाप के सामने नम ऑंखें लिये बैठा हूँ जिसने बेटे के क़ातिलों को माफ़ करके पूरे शहर को जलने से बचाकर पूरे मुल्क में इंसानियत की एक मिसाल कायम की !!

पूरी रात नमाज़ में बेटे की सलामती की दुआ मॉंगते रहे इमाम साहब कुरेदने पर बताते हैं कि मैंने तो अपने रसूल मुहम्मद साहब की बात पर अमल करते हुए छोटा सा किरदार दुनिया के सामने रखा! आज बिना बताये आसनसोल आया हूँ इस बाप के ऑंसू अपने दामन में समेटने…………!!

मैं राह का चराग़ हूँ सूरज तो नहीं हूँ,

जितनी मेरी बिसात है काम आ रहा हूँ मैं”

इमरान की इस बेहतरीन कोशिश का सोशल मीडिया पर खासा अच्छा असर देखने को मिल रहा है जहाँ उनके विरोधी भी उनके इस बेहतरीन काम के लिये दिल खोलकर उनकी प्रशंसा कर रहे हैं और लोगों को इससे सबक़ हासिल करने का मशवरा दे रहे हैं।