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कर्नाटक में अगर BJP सरकार बनाती है तो नारा ‘अबकी बार भाजपा सरकार’ नहीं बल्कि ‘अबकी बार भ्रष्ट सरकार’ होना चाहिएः कन्हैय्या

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नई दिल्ली – कर्नाटक में बहुमत न मिल पाने के बावजूद सरकार बनाने के लिये जोड़ तोड़ की मेहनतो में लगी भाजपा पर जवाहर लाल नेहरू विश्निद्याल के पूर्छ छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैय्या कुमर ने निशाना साधा है। कन्हैय्या ने कहा कि अगर कर्नाटक में भाजपा सरकार बना लेती है तो बनाती है तो नारा ‘अबकी बार भाजपा सरकार’ नहीं बल्कि ‘अबकी बार भ्रष्ट सरकार’ होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता का फैसला आ गया हैI भाजपा वोट के दम पर तो सरकार नहीं बना पा रही हैI देखना दिलचस्प होगा कि नोट (रेड्डी बंधुओं) के दम पर सरकार बना पाती है कि नहीं? अगर बनाती है तो नारा ‘अबकी बार भाजपा सरकार’ नहीं बल्कि ‘अबकी बार भ्रष्ट सरकार’ होना चाहिएI वैसे मोटा भाई ने मोटा माल से मेघालय में दो विधायक के दम पर सरकार बनाई है।

कन्हैय्या ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट में छात्रों के साथ हुई बदसलूकी पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कन्हैय्या ने कहा कि जब देश जिन्ना-सावरकर की फ़र्ज़ी बहस में उलझा हुआ था, तब मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ में विद्यार्थियों की अस्मिता के साथ भद्दा खिलवाड़ किया जा रहा था। साथी संदीप गुप्ता को पूरी फ़ीस नहीं चुका पाने के कारण डिग्री की जगह कार्डबोर्ड थमा दिया गया, जिसमें फ़ीस नहीं देने की बात लिखी हुई थी। यही नहीं, इस संस्थान के एक अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया कि जो विद्यार्थी फ़ीस नहीं देता वह अपनी डिग्री का सम्मान नहीं करता।

साफ़ शब्दों में कह रहा हूँ। जो लोग विद्यार्थियों के पढ़ने के अधिकार का मतलब नहीं समझते, उन्हें न तो ‘सम्मान’ शब्द का अर्थ मालूम है न ‘लोकतंत्र’ का। मुंबई या किसी भी बड़े शहर में रहना कितना महँगा है, यह हम सभी जानते हैं। सरकार अपनी जनविरोधी नीतियों से दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों आदि को शिक्षा से दूर करने की कोशिश कर रही है। भारत सरकार की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप को लेकर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के साथी महीनों से संघर्ष कर रहे हैं।

बिहार से मुंबई जाकर उच्च शिक्षा पाने के अपने संघर्ष के दौरान संदीप का जो अपमान हुआ है वह असल में देश के हर उस व्यक्ति का अपमान है जो शिक्षा को बाज़ार का माल नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मज़बूत बनाने का साधन मानता है।

इस देश के युवा ऐसा अपमान कभी नहीं सहेंगे। जिस देश में कई गुना ज़्यादा कीमत चुकाकर राफ़ेल जैसे लड़ाकू विमान खरीदे जाते हैं और जहाँ एक मूर्ति पर हज़ारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, वहाँ उच्च शिक्षा के बजट में लगातार कटौती करना लोकतंत्र का अपमान नहीं तो और क्या है? अपने ही नागरिकों को शिक्षा का ग्राहक बनाने वाले लोग देश और लोकतंत्र को खोखला कर रहे हैं। अगर हमें अपने देश से प्यार है, तो हमें उन्हें रोकना ही होगा।