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पाकिस्तानः उलेमा की नाराजगी के बाद इमरान खान ने ‘क़ादियानी’ को किया अपनी सरकार से बाहर

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नई दिल्ली  इमरान खान की नई नवेली सरकार घण्टे ही विवादों का शिकार होगई है,क्योंकि इमरान खान ने एक ऐसे व्यक्ति को सरकार में महत्वपूर्ण पद पर बिठाया था जो मुसलमानों के लिये सबसे ज़्यादा नुकसानदेह फ़िरक़ा क़ादियानी से ताल्लुत रखता था,जिसके बाद देशभर में हंगामा मच गया।

इमरान खान ने पाकिस्तान में बढ़ते विरोध को देखकर आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल किए गए प्रिंस्टन विवि के जाने-माने अर्थशास्त्री आतिफ मियां को इस्तीफा देने के लिए कह दिया। आतिफ मियां से इस्तीफा इसलिए मांगा गया, क्योंकि वह अहमदी समुदाय(क़ादियानी) का है।

अहमदी समुदाय के लोगों को मुसलमान नहीं माना जाता। पाकिस्तान के पहले नोबेल विजेता प्रोफेसर अब्दुल सलाम भी अहमदी समुदाय के थे। आज पाकिस्तान में उनका कोई नाम नहीं लेता। बहुत पहले उनकी कब्र पर उनके नाम के आगे लिखा मुस्लिम शब्द भी खुरच दिया गया था।

यह दिलचस्प है कि जब आतिफ मियां को आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल करने को लेकर कट्टरपंथी तत्वों के विरोध के स्वर उभरे थे तो इमरान खान और उनके सहयोगियों ने कहा था कि वे ऐसे तत्वों के आगे नहीं झुकेंगे, लेकिन आखिरकार वे झुक ही गए। दो दिन पहले तक इमरान खान के जो सहयोगी यह दलील पेश कर रहे थे कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भी एक अहमदी को विदेश मंत्री बनाया था वे ही अब यह तर्क दे रहे हैं कि सरकार विवाद बढ़ाने वाला कोई काम नहीं करना चाहती।

इमरान खान को इसलिए कहीं अधिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि आतिफ को हटाए जाने के विरोध में आर्थिक सलाहकार परिषद के एक और सदस्य एवं हार्वर्ड विवि के प्रोफेसर असीम एजाज ख्वाजा ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले पर अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने फक्र का इजहार किया है।

इमरान खान द्वारा आर्थिक सलाहकार परिषद से आतिफ मियां को हटाने के फैसले का विरोध करने वाले यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे ही बनेगा नया पाकिस्तान? आतिफ मियां को हटाने का विरोध इमरान की पहली पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने भी किया है। एक ट्वीट के जरिये उन्होंने कहा है कि इस फैसले का बचाव नहीं किया जा सकता। यह निराशाजनक है।

क़ादियानी अहमदी नबी सलल्लाहू की नुबूवत का इनकार करते हैं और गुलाम अहमद क़ादियानी के बारे में नुबूवत का दावा करते हैं,इस कारण से ये लोग इस्लाम से खारिज माने जाते हैं,क्योंकि वो खत्म रिसालत के विरोध करते हैं जो इस्लाम का ज़रूर हिस्सा है।