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भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण की रिहाई पर इस तरह मनाया जा रहा है जश्न, भाजपा पर भी हो रहे हमले

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नई दिल्ली – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ को समय से पहले रिहा करने का निर्देश जारी किया है। चंद्रशेखर को बीते साल सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था। उन पर हिंसा भड़काने के आरोप थे। गृह विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रावण की मां की अपील पर विचार करते हुए उन्हें समय से पहले रिहा करने का फ़ैसला किया गया है।

मामले में चंद्रशेखर रावण सहित छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिनमें से तीन को पिछले सप्ताह रिहा कर दिया गया था। फिलहाल चंद्रशेखर रावण के साथ जेल में बंद उनके दो सहयोगियों के रिहाई के भी निर्देश दिए गए हैं। चंद्रशेखर को एक नवंबर को रिहा किया जाना था। गौरतलब है कि चंद्रशेखर रावण बीते 16 महीनों से जेल में बंद हैं, उन पर राज्य सरकार ने रासुका के तहत कार्रावाई की थी।

सोशल मीडिया पर जश्न

चंद्रशेखर रावण की रिहाई की ख़बर से सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है। पत्रकार अरविंद शेष ने टिप्पणी करते हुए लिखा है कि अहा… संघियों-भाजपाइयों की सरकार तो दलितों के पक्ष में क्रांतिकारी होती नजर आ रही है..! पाखंडी कहीं के… चंद्रशेखर को गिरफ्तार जब किया गया था, तब भी तुम्हारा ही सामंती धूर्त खेल था और अब चंद्रशेखर के हक के तौर पर रिहाई को दलितों पर मेहरबानी की शक्ल में पेश करोगे तो भी तुम्हारा धूर्त खेल ही है! मगर अफसोस… अब तुम्हारी यह पोल भी इधर समझ ली गई है..! अब यह आवाज की रफ्तार के साथ जाएगी जमीन पर और वहां से उट्ठी धूल का गुबार तुम्हारे वहम को नेस्तनाबूद कर देगा..! अगर यह ख़्वाब है तो ख़्वाब सही.. कि जमीन पर ख्वाब ही उतरते हैं.. !

कौन देगा 16 महीनों का हिसाब

पत्रकार विक्रम सिंह चौहान ने टिप्पणी करते हुए लिखा है कि साथी चंद्रशेखर रावण को रिहा करने का फैसला योगी आदित्यनाथ सरकार का एहसान नहीं है ,यह बहुजन समाज का ताक़त है ,भीम आर्मी का दबाव है। बीजेपी सोची समझी साजिश के तहत गोदी मीडिया के सहारे यह खबर फैला रही है कि वे उनके माँ के आवेदन के आधार पर मानवीय आधार पर उन्हें समय से पूर्व रिहा कर रही है। पर योगी उर्फ़ अजय सिंह बिष्ट की मानवता तब क्यों नहीं जगी जब यही माँ गुहार लगा रही थी कि मेरे बेटे को छोड़ दीजिये ,जब बुरी तरह अमानवीय प्रताड़ना के बाद अच्छा भला तगड़ा जवान युवक चंद्रशेखर व्हीलचेयर पर दिखे तब योगी की मानवता कहाँ गई थी?

इस सवाल का जवाब कौन देगा 16 माह तक उन्हें जेल में क्यों रखा गया, उन पर रासुका क्यों लगाया गया,क्या दलितों का आवाज उठाना देशद्रोह है? योगी इसका जवाब देना होगा ,सिर्फ रिहाई से तुम्हारे पाप नहीं धूल नहीं जायेंगे। दलितों की हत्याएं हो ,दलितों का घर जलाये जाये और सजा भी एक दलित युवक को ही भुगतना पड़ा,इसे यह देश बर्दाश्त नहीं करेगा ,देश का संविधान बर्दाश्त नहीं करेगा। यह देखना बाकी रहेगा कि बाहर आने के बाद चंद्रशेखर क्या हैं..!