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शरिया अदालत विवादः AAP सांसद संजय सिंह बोले, ‘दारुल कज़ा के गठन को मीडिया शरिया अदालत बता रहा है’

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नई दिल्ली – ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनलॉ बोर्ड ने हर जिले में शरिया अदालत शुरू करने की योजना तैयार की गई है, लेकिन शरिया अदालत की ये योजना विवादों में घिर गई है। मुस्लिम पर्सनलॉ बोर्ड की इस योजना ने भाजपा को एक बार फिर राजनीतिक रोटी सेंकने का मौका दे दिया है। उधर शरिया अदालत को लेकर मीडिया ने भी भ्रामक खबरें चलाना शुरू कर दीं, भाजपा की तरफ से सवाल उठाये जा रहे हैं कि भारत इस्लामिक गणतंत्र नही है लिहाजा इस तरह की योजनाओं को अमल में न लाया जाये।

अब इस विवाद में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी कूद गए हैं, उन्होंने मुस्लिम पर्सनलॉ के पदाधिकारियों पर भी सवालिया निशान लगाया है, और मीडिया के प्रोपगेंडे को भी आड़े हाथों लिया है।

आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि दारुल कज़ा के गठन को मीडिया शरिया कोर्ट बता रहा है लेकिन ये समझ से बाहर है की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चुनाव से पहले भाजपा को अफवाह फैलाने का मौका क्यो दिया? जब इतने सालों से दारुल कज़ा का गठन नही हुआ तो चुनावी साल में ये बखेड़ा क्यों खड़ा किया गया?

क्या होती है दारुल कज़ा

दारुल कज़ा इस्लामिक शरिया (इस्लाम धर्म के कानून) के मुताबिक अदालत होती है। जिसमें मुसलमानों के मामले जैसे शादी, तलाक, जायदाद का बंटवारा, लड़कियों को जायदाद में हिस्सा देना शामिल होते हैं। दारुल कजा में एक या उससे अधिक जज हो सकते हैं, जिन्हें काजी कहा जाता है।

ये काजी इस्लामिक शरिया के जानकार होते हैं। मौजूदा वक्त में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधीन देश भर में 50 दारुल कजा संचालित हैं। आमतौर पर सुन्नी मुसलमान दारुल कजा को मान्यता देते हैं। मुस्लिम पर्सनलॉ बोर्ड 1993 से देश में दारुल कजा संचालित कर रहा है। अब मुस्लिम पर्सनलॉ बोर्ड का इरादा है कि देश के हर जिले में कम से कम एक दारुल कजा की स्थापित की जाए।