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दुबई: ‘ब्लड मनी’ देकर 15 भारतीयों को फांसी की सजा से बचाया, एसपी सिंह की कोशिश से वापस लौटे सभी 15 भारतीय

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नई दिल्ली – दुबई में ‘ब्लड मनी’ देकर 15 भारतीयों को फांसी की सजा से बचा लिया गया है। बता दें कि इन सभी को शराब की गैरकानूनी बिक्री और हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था। लेकिन दुबई के मशहूर कारोबारी और समाजसेवी एसपी सिंह ओबराय की सहायता से इन्हें बचा लिया गया है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक भारतीय को छोड़ कर बाकी सभी अपने परिवारों के पास लौट आए हैं।

होटल व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय इन सभी 15 भारतीयो को मीडिया के सामने लेकर आए। उन्होंने कहा कि यूनाईटेड अरब अमीरात (UAE) जाने वाले पंजाबी युवाओं को शराब तस्करों के चंगुल से बचना सीखना चाहिए। उन्होंने बताया कि दुबई में शराब तस्करी को लेकर अलग-अलग गुटों में टकराव है। अगर इसमें किसी शख्स की मौत हो जाती है तो यहां के कड़े कानून के अनुसार दोषी पाये जाने पर फांसी की सजा का प्रावधान है।

एसपी सिंह ने बताया कि अमृतसर के हरविंदर, नवांशहर के रणजीत सिंह, होशियारपुर के दलविंदर सिंह, पटियाला के सूचा सिंह और बिहार के छपरा जिले के धर्मेंद्र कुमार को शारजाह में फांसी की सुनाई गई थी। इन पर 2011 में वीरेंद्र चौहान नाम के शख्स की हत्या का आरोप था वीरेन्द्र चौहान उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला था। वहीं, एक दूसरे मामले में पंजाब के 10 लोगों को अक्टूबर 2016 में फांसी की सजा दी गई थी। उन पर अबू धाबी में पाकिस्तान के एक नागरिक मोहम्मद फरहान की हत्या का आरोप था।

होटेल कारोबारी एसपी सिंह ने बताया कि कैसे उन्होंने मृतकों के परिवारों से संपर्क किया और उन्हें दुबई के कानून के मुताबिक ब्लड मनी (गैर-इरादतन हत्या के मामले में पीड़ित के सगे-संबंधी को बतौर मुआवाजा दी जाने वाली रकम) लेने के लिये राजी किया। उनके मुताबिक सरबत दा भला ट्रस्ट ने सभी भारतीयों को छुड़ाने के लिए बड़ी भारी रकम का भुगतान किया। इसके बाद UAE की अदालतों ने समझौता स्वीकार कर सभी भारतीयों को रिहा किया।