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मुंबई दंगे 1992: दंगों में मुस्लिम परिवार ने बचाई थी फिल्म मेकर विकास खन्ना की जान, तभी से हर साल मुस्लिम परिवार के लिये रखते हैं रोज़ा

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वसीम अकरम त्यागी

नई दिल्ली – 1992-93 में मुंबई में भीषड़ दंगे हुए थे, ये दंगे हिन्दुवादियों की भीड़ द्वारा बाबरी मस्जिद शहीद किये जाने के बाद शुरू हुए थे जिसमें एक हजार से अधिक लोगों की जानें गई थीं। जैसा कि अक्सर होता है कि इंसान से शैतान बनी भीड़ के बीच भी कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इंसानियत का फर्ज निभाना नहीं भूलते। ऐसा ही उस दौरान भी हुआ था।

1992 में विकास खन्ना एक होटल में काम किया करते थे, उसी दौरान दंगा हो गया वे होटल से निकले और दंगे में अपने भाई को तलाश करने लगे, तभी उनपर एक मुस्लिम परिवार की नजर पड़ी, उस परिवार के लोगों ने विकास को अपने पास बुला लिया और अपने घर ले गये। विकास ने ये बातें अनुपम खेर को एक इंटरव्यू के दौरान बताई हैं।

उन्होंने बताया कि जब वे रास्ते में अपने भाई को तलाश रहे थे तभी एक मुस्लिम परिवार के लोगो ने उनसे पूछा कि कहां जा रहे बेटा देखते नहीं आगे दंगाई हैं, और यह कहकर वे उन्हें अपने साथ ले गये, तभी दंगाई उनके दरवाजे पर आ धमके और उनसे पूछा कि ये कौन है ? तो उस परिवार ने कहा कि ये हमारा बेटा है आज ही बाहर से आया है। विकास बताते हैं कि मुझे अच्छी तरह याद है कि उस परिवार में एक लड़की और दो लड़के यानी कुल तीन बच्चे और उनके मां बाप थे।

विकास बताते हैं कि उस परिवार ने न सिर्फ उनकी जान बचाई बल्कि उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को नसीहत करके भेजा कि देखो और पता करो कि मेरा भाई सुरक्षित है या नहीं, आखिरकार उस परिवार के रिश्तेदार ने मुझे आकर बताया कि मेरा परिवार सुरक्षित है।

विकास कहते हैं कि 25 साल गुजर गये हैं, मैं कभी उस परिवार से मिल नहीं पाया लेकिन जब भी रमजान का महीना आता है मैं उस परिवार के लिये एक रोजा रखता हूं और भगवान, गॉड, अल्लाह, ईश्वर जो भी है उससे उस परिवार की सलामती की दुआ करता हूं।

तो 26 साल बाद मिला वह परिवार

फिल्ममेकर और लेखक होने के साथ साथ जाने माने कुक विकास खन्ना को वह परिवार 26 साल बाद इसी रमज़ान में मिला है। हालांकि यह जानकारी विकास द्वारा तो नहीं मिली है लेकिन वरिष्ठ पत्रकार और फिल्ममेकर विनोद कापड़ी ने यह जानकारी ट्वीट करके दी है, जिसमे उन्होंने कहा है कि यही है अपना हिन्दुस्तान।

विनोद ने कहा है कि मुंबई में दंगे, वो हिंदू था, उसे मुसलमान ने बचाया, फिर वो 25 साल तक उस अनजान के लिए, हर साल रोज़ा रखता रहा, और 26वें साल में, उसे मिल गया वो अनजान मुसलमान, नफरत के बीज बोने वालों देख लो, ये है अपना असली हिंदुस्तान!!!