Home देश गोदी मीडिया के नाम वरिष्ठ पत्रकार का खुला ख़त, ‘बदला लेने की...

गोदी मीडिया के नाम वरिष्ठ पत्रकार का खुला ख़त, ‘बदला लेने की हुंकार में सरकार से सवाल पूछने की जहमत भी कर लें।’

SHARE

प्रिय एंकर एवं एंकरनियों,

बदला लेने की हुंकार में सरकार से सवाल पूछने की जहमत भी कर लें। उन चूकों को हवा में न उड़ाएं, जिसकी वजह से हमारे जवान शहीद हुए। कैसे 350 किलो आरडीएक्स लादकर एक गाड़ी सीआरपीएफ के काफिले पर टकरा दी गई? हमले का इनपुट पहले ही मिल चुका था, फिर ये चूक कैसे हो गई? आतंकवादियों ने जो किया, वह किया, लेकिन खुफिया एजेंसियों की चूक भी इस हमले की जिम्मेदार है। इस लापरवाही के जिम्मेदारों को कठघरे में क्यों खड़ा नहीं किया जा रहा है? क्या सरकार से सवाल नहीं किए जाने चाहिए? आखिर कब करेंगे सरकार से सवाल? क्या सरकार को माफ किया जा सकता है?

गोदी मीडिया का रवैया बेहद शातिराना है। वह बदले की हुकारों को आगे करके उन जरूरी सवालों से मुंह चुरा है, जो उसे सरकार से पूछने चाहिए। ये शातिरपना नहीं तो और क्या है कि पूरे हादसे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। एक एंकर चिल्ला रहे थे कि मेरा दिल कर रहा है कि मैं बंदूक लेकर जाऊं और आतंकवादियों को भून डालूं। प्रिय एंकर बंदूकें तो हमारे सुरक्षाकर्मियों के पास भी हैं, ये काम उन्हें ही करने दें, करना भी चाहिए। आपका जो काम है, वह करिए। लेकिन आप वह भी नहीं कर रहे हैं। आप तो एक तरह से सरकार के पक्ष में खड़े होकर विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा कर कर रहे हैं।

गोदी मीडिया को ये सवाल भी करना चाहिए कि आखिर कैसे हमले के फौरन बाद खुफिया एजेंसियों को आतंकवादियों का नाम और पता मिल जाता है? अगर हमारी खुफिया एजेंसियां इतनी ही तेजर्रार हैं तो उनकी ये तेजतर्रारी तब कहां चली जाती है, जब हमले का इनपुट मिलने के बाद हमला नाकाम नहीं कर पातीं? आखिर विस्फोट होने के फौरन बाद ये कैसे पता चल गया कि कार में कितना विस्फोटक लदा था? पाकिस्तान को दोष देना सबसे आसान काम और अपनी जवाबदेही से बचना है। असली सवालों पर बर्फ की सिल्ल्यिों के नीचे दबा दिया जाता है।

ये भी नहीं भूलना चाहिए कि पिछले कई साल से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करते हुए कई ऐसे लोग पकड़े गए हैं, जो न कश्मीरी हैं, न मुसलमान। कई का ताल्लुक तो भाजपा से बताया गया था।  उन से भी पूछताछ बनती है या नहीं?  हनीट्रैप (हनीट्रैप में फंसे होने का बताकर उनका गुनाह हल्का किया जाता है, वैसे वे होते हैं जासूस ही ) में फंसे कई सेना के जवान देश की गोपनीय जानकारी देते हुए पकड़े गए हैं, उनसे पूछताछ क्यों जरूरी नहीं है?  बताया गया था कि बहुत सारे जवान हनीट्रैप में फंसे हुए हैं, जिन पर नजर रखी जा रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सीआरपीएफ के श्रीनगर जाने का शेड्यूल ऐसे ही किसी हनीट्रैप में फंसे हुए जवान ने तो नहीं बता दिया था आतंकवादियों को? लेकिन गोदी मीडिया के एंकर और एंकरनियों को तो बस एक ही काम है, पाकिस्तान पर हमला कर दो, सर्जिकल स्ट्राइक 2 कर दो।

(लेखक सलीम अख़्तर सिद्दीक़ी वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

मोबइल पर नेशनल स्पीक की एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिये यहां क्लिक करें