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चन्द्रशेखर आज़ाद की अपील, ‘मीडिया आपको तवज्जो नहीं दे तो आप मीडिया को ही बदल दें’

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नई दिल्ली, 6 फरवरी। भारत में मीडिया कैंसर से ग्रस्त है। जो तथाकथित मुख्यधारा का मीडिया है, उसे पेड न्यूज़, राजनीतिक एजेंडों और झूठ बोलने से ही फुरसत नहीं। आजकल इसका शिकार मैं भी हूँ। जो नहीं कहा- वह बुलवाना इस ब्राह्मणवादी, शहरी, सवर्ण, बेईमान मीडिया का काम है। अच्छा भी है। ये जितनी अपनी साख खोएंगे, जनता उतना ही वैकल्पिक मीडिया को अपना मीडिया समझकर उसे अपना लेगी। यह विकल्प ही मूल है और जो मूल है, वही सत्य है। यह बात आज भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने नेशनल स्पीक एप्लीकेशन के लॉन्च के दौरान कही। एप्लीकेशन के सम्पादक वसीम अकरम त्यागी ने इस दौरान उनका स्वागत किया।

भीम आर्मी के प्रमुख ने कहाकि हमारा टेलीविज़न, अख़बार और परम्परागत मीडिया सत्ता के साथ खड़ा है। समाज ख़ाली है। यह गिरावट का ऐसा दौर है कि मीडिया ने अपना रवैया सत्ता से जोड़ लिया है। मीडिया को और आसानी हो जाती है जब उसे बहुजन के ख़िलाफ़ अपना एजेंडा चलाने के लिए मानसिक खाद और पैसा दोनों मिलते हैं। उन्होंने कहाकि आप याद कीजिए तो आपको पता चल जाएगा कि मीडिया बहुजन के ख़िलाफ़ क्यों है। साल 2014 से पहले इस मीडिया को ख़बर प्रसारण के लिए मैनेज किया जाता था लेकिन वर्ष 2014 के बाद से ख़बर छिपाने की मीडिया ने नीति बना ली। उन्होंने कहाकि  मीडिया आगरा की संजली के क़त्ल, भारत बंद के दौरान सहारनपुर में बहुजनों पर अत्याचार, 13 पोइंट रोस्टर के लागू होने से बहुजन मूलनिवासियों को उच्च शिक्षा से वंचित करने की ख़बरें नहीं दिखाता है और ना ही उसे प्रसारित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यधारा के कथित मीडिया ने ‘भारत को चलाने’ के बयान को ‘भारत को जलाने’ के रूप में झूठ बोला। यह झूठ वह रात दिन परोसता है। उन्होंने मीडिया के भक्ति काल की चर्चा करते हुए कहाकि नोटों में चिप ढूंढने वाले मीडिया से आप सरोकार की पत्रकारिता की कामना नहीं कर सकते। आज़ाद ने कहाकि देश के मूलनिवासी, बहुजन, ट्राइबल, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों की ख़बरों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद एंव नेशनल स्पीक के संपादक वसीम अकरम त्यागी

पूरी दुनिया के मूलनिवासी हो रहे हैं जुल्म के शिकार

उन्होंने फ़िलस्तीन और वेनेज़ुएला का उदाहरण देते हुए कहाकि इन देशों में भी मूलनिवासियों पर ज़ुल्म हो रहा है और दुनिया का ज़ायोनिस्ट मीडिया उनकी प्रताड़ना पर खामोश है। उन्होंने कहाकि फिलस्तीन में अपने ही देश से निकाले गए मज़लूम फ़िलस्तीनियों की ख़बरों पर सीएनएन, बीबीसी ख़ामोश रहता है और ज़ायोनिस्ट ताकतों के दबाव में इज़राइल के क़ब्ज़े को जायज़ बता देता है। अपने ही देश में अपने घर की माँग कर रहे गाजा और पूर्वी बैंक के करोड़ों फ़िलस्तीनियों के सवाल को यही मीडिया ग़ायब करता है। गाजा में अपने घर के लिए रास्ता मांग रहे हज़ारों फिलस्तीनियों पर ज़ालिम ज़ायोनिस्ट इज़राइल के जुल्म की दास्तान का भी ज़िक्र नहीं होता और अगर एक फ़िलस्तीनी लड़का किसी इज़राइली से अपने देश को आज़ाद करने की माँग कर ले तो घटिया मीडिया उसे आतंकवादी लिखता है।

दक्षिण अमेरिका के हालिया घटनाक्रम और मीडिया के रवैये पर चन्द्रशेखर ने कहाकि कमोबेश ऐसा ही वेनेज़ुएला के साथ हो रहा है। एक देश में निकोलस मदुरो की चुनी हुई सरकार पर दूसरे राष्ट्रपति को बिठाकर वेनेज़ुएला के बारे में झूठ बोला जा रहा है। कौन है मदुरो। वेनेज़ुएला का मूल निवासी जो अपने देश के तेल को अमेरिका और गोरों के साथ बांटना नहीं चाहते। वेनेज़ुएला में उनके ही देश में रह रहे गोरे स्पैनी लोगों ने साँठ गाँठ कर बर्बादी फैलाने में कोई कसर नहीं रखी। ख़ुद वेनेज़ुएला के मूलनिवासी अपने मूलनिवासी राष्ट्रपति निकोलन मदुरो के साथ हैं लेकिन पूरी दुनिया को वेनेज़ुएला से उन्हें हटाना है ताकि तेल, संसाधन पर क़ब्जा करके वेनेज़ुएला को लूटा जा सके। मैं आपसे कहना यह चाह रहा हूं कि भारत हो या फिलस्तीन, वेनेज़ुएला हो या ग्वाटेमाला, क्यूबा हो या निकारगुआ। हर देश में मूलनिवासी की आवाज़ को दबाने के लिए राजनीति, कॉर्पोरेट और मीडिया ने एक झूठ और लूट का खेल रचा है। अगर हम इसे नहीं समझेंगे तो हम और गर्त में चले जाएंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से अपील की कि यह मीडिया आपको ग्राहक समझता है और आपके ही ख़िलाफ़ काम करता है। इसका इलाज यह है कि आप इसका माल मत ख़रीदिए। आप टेलीविज़न से कम्प्यूटर और अख़बार से वेबसाइट पर चले जाइए। हम पैसा भी ख़राब करें और विरोध भी झेलें। दो नुक़सान हम एक साथ बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इस अवसर पर नेशनल स्पीक के सम्पादक वसीम अकरम त्यागी ने कहाकि भारत में मीडिया की स्थिति को सुधारने के लिए वैकल्पिक मीडिया की आवश्यकता है। नेशनल स्पीक इस आवश्यकता को पूरा करेगा। उन्होंने दोहराया कि मीडिया बाज़ार को प्राथमिकता देता है, सेवा और हित को नहीं जबकि वैकल्पिक मीडिया सरोकार की पत्रकारिता करता है। उन्होंने नेशनल स्पीक के माध्यम से लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का वादा करते हुए भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर आज़ाद का शुक्रिया अदा किया। त्यागी ने कहाकि में सामन्तवाद और ब्राह्मणवाद की जड़ें अधिक गहरी हैं। यही वजह है कि समाज आर्थिक स्तर के अतिरिक्त जाति एवं धर्म के आधार पर बंटा है। यह बंटवारा ख़तरनाक स्तर तक नस्लवादी है। इसके दुष्परिणाम को रेखांकित करते हुए उपेक्षित दलित, बहुजन, मूलनिवासी, ट्राइबल, मुस्लिम और महिलाओं के मुद्दों को नेशनल स्पीक कवर करता रहेगा। त्यागी ने अपने निजी अनुभव बाँटते हुए कहाकि वह भी ट्रॉल एवं मीडिया माफिया के शिकार हैं लेकिन वह हार नहीं मानेंगे। उन्होंने सत्य की शक्ति के बल पर अपनी पोर्टल एवं एप्लीकेशन को आगे बढ़ाते रहने का आश्वासन दिया।

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रशांत टंडन ने कहाकि मुख्य संस्थानों पर वर्चस्वादी ताक़तों का कब्ज़ा है। आर्थिक उदारीकरण के बाद से जिस समाज का भला हुआ वह भी वर्चस्ववादी ताक़तें ही थीं। तकनीकी विकास के बाद छोटे शहरों तक समृद्धि पहुँची जिसने नए स्किल की माँग की। इन छोटे शहरों के हाशिये पर डाले गए दलित, ट्राइबल, मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग पैदा हुआ। इस नए आर्थिक पिछड़े वर्ग ने अपनी दूसरी पीढ़ी तक आर्थिक प्रगति हासिल की। यहाँ से दलित, ट्राइबल, मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग ने नीति में अपना प्रतिनिधित्व मिला। हम आज उसी दौर में हैं और यही वजह है कि प्रोफेसर आनन्द को गिरफ्तार किया जाता है। यह डर ही चन्द्रशेखर आज़ाद को गिरफ्तार कर उन्हें जेल तक पहुँचाता है। यह डर पिछड़ों से हैं और इस साज़िश को समझना होगा। यह मुख्यधारा नहीं, अतिवादी मीडिया है जिन्होंने आज से 10 साल पहले किए अपने सर्वे में पाया कि दलित, ट्राइबल, मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग की भागीदारी मीडिया में 10 प्रतिशत और महिलाओं की भागीदारी 3 प्रतिशत से भी कम है। यह भागीदारी बढ़ानी चाहिए। जिसे आप बहुसंख्यकवाद कहते हैं, वही मनुवादी हैं। सोशल मीडिया की भागीदारी को समझिए। ईरान से हमें सीखना चाहिए जो प्रतिबंध और अमेरिकी प्रोपैगैंडा के बावजूद अपने प्लैटफॉर्म बना लिए हैं। वह फेसबुक, ट्वीटर और यूट्यूब के मोहताज नहीं बल्कि अपने डिजिटल प्लैटफॉर्म के साथ अपनी बात कह रहे हैं। फेक न्यूज़ में भी सोशल मीडिया की भागीदारी है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में एप्लीकेशन के डवलपर आसिम शेख़, भीम आर्मी के सलाहकार डॉ. कुश, समाजसेवी अबुज़र क़ुरैशी, शामिर क़ुरैशी समेत कई गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में मौजूद थे।

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