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भीम आर्मी के चंद्रशेखर आज़ाद बोले ‘तलवार से नहीं फैला इस्लाम, यह शांति का है मज़हब’

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नई दिल्ली – देश की राजधानी स्थित इंडियन इस्लामिक कल्चरल सेंटर में मशहूर युवा पत्रकार वसीम अकरम त्यागी के संपादन में चलने वाली न्यूज़ वेबसाईट नेशनल स्पीक की एप्लिकेशन लांच की गई। नेशनल स्पीक की एप्लीकेशन को भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने लांच किया, इस मौके पर उन्होंने अपने जेल के अनुभव भी शेयर किए।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने ‘अस्सलामुअलैयकुम’ से अपना अभिवादन शुरू किया। पहले ही शब्द पर इंडिया इस्लामिक सेंटर का बरामदा तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि जब मैं जेल में था तो उस दौरान जेल में बंद कई मुसलमानों के साथ दोस्ती हो गई, वे लोग मेरी रिहाई के लिये दुआऐं करते थे, उन्होंने बताया कि जेल में मुझसे हर रोज कोई न कोई मुस्लिम मुलाकात के लिये आता था और मेरी रिहाई की दुआऐं करता था। चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि रमजान का मुबारक महीना बीत जाने के बाद ईद आई, तो मैंने भी देश और समाज के लिये दुआ की।

मेरे बारे में फैलाई गई अफवाह

चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि मेरे बारे में अफवाह फैलाई गई कि मैंने इस्लाम कुबूल कर लिया है। उन्होंने कहाकि जब वह 25 साल की उम्र में हिन्दू नहीं बन सके तो मुसलमान क्या बनते। आज़ाद ने कहाकि वह क़ुरान को ईश्वरीय वाणी मानते हैं और क़ुरान के हर हर्फ का सम्मान करते हैं। उन्होंने जेल के अपने अनुभव याद करते हुए कहाकि जेल में मेरे लिए यह बात आम हो चुकी थी कि जो भी मुसलमान जेल में आएगा, उसे चन्द्रशेखर से मिलना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम क़ैदियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए मुसलमानों को बेहतर दोस्त बताया।

चन्द्रशेखर ने कहाकि जेल जैसी बाहर से दिखाई जाती है, उससे ज़्यादा बुरी होती है। यह और ख़राब हो जाती है अगर क़ैदी मूलनिवासी हो।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद एंव नेशनल स्पीक के संपादक वसीम अकरम त्यागी

तलवार से नहीं फैला इस्लाम

चन्द्रशेखर आज़ाद ने कहाकि इस्लाम सच्चा दीन है। यह ताक़त और तलवार के बल पर नहीं बल्कि सच्चाई की शक्ति के दम पर फैला है। आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों के योगदान को याद करते हुए चन्द्रशेखर ने कहाकि पहली और आज़ादी की दूसरी लड़ाई में दिल्ली के हर पेड़ पर एक मौलवी को फांसी दी गई थी। हम इस बलिदान को कम करके नहीं आंक सकते। इस देश की तरक़्की में सबका योगदान है। इसे कोई साम्प्रदायिक, अंग्रेज़ों का मुखबिर संगठन भुलवा नहीं सकता।

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