Home देश UP: 2019 से पहले ही भाजपा को लगा करारा झटका, महिला सांसद...

UP: 2019 से पहले ही भाजपा को लगा करारा झटका, महिला सांसद ने दिया इस्तीफा, अल्पमत में मोदी सरकार

SHARE

नई दिल्ली – 2019 के आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका लगा है, उत्तर प्रदेश की  बहराइच से भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने पार्टी से इस्तीफ़ा दिया, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा पार्टी समाज बांट रही है। बता दें कि भाजपा की दलित महिला सांसद लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रही थीं, दो अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद इस महिला सांसद ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमला बोल दिया था।

अल्पमत में मोदी सरकार

गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में 281 सीटें जीती हैं, लेकिन 2018 खत्म होते होते यह संख्या कम होते होते 271 पर पहुंच गई है। अगर एनडीए नहीं होता तो भाजपा की सरकार गिर जाती।

क्या कहा था तब

भाजपा सांसद साध्वी सावित्री बाई फूले ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही अपनी पार्टी और सरकार से बगावती तेवर दिखा दिया है. उन्होंने  था कहा कि संविधान और आरक्षण खतरे में है. मैं सांसद रहूं या ना रहूं लेकिन संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं होने दूंगी. सांसद सावित्री फुले ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन केंद्र सरकार पर खूब हमले बोले. उन्होंने कहा, कत्ल होने से आखिर कहां तक डरूं, कातिलों के मोहल्ले में घर ले लिया.

लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में प्रदर्शन के दौरान सावित्री बाई फुले ने कहा था कि हम आरक्षण की मांग कर रहे हैं. यह कोई भीख नहीं है. भारतीय संविधान आरक्षण बचाओ रैली में उन्होंने डॉ भीमराव आंबेडकर और बसपा के संस्थापक कांशीराम की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर किया.सांसद सावित्री बाई फुले ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है. उन्होंने लखनऊ में केंद्र सरकार की दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ भारतीय संविधान व आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन किया था.

उन्होंने कहा था कि यदी शासक वर्ग ने भारत के संविधान को बदलने और हमारे आरक्षण को खत्म करने का दुस्साहस किया तो भारत की धरती पर खून की नदियां बहेंगी. यह हमारे बाबा साहेब का दिया अधिकार है किसी और के बाप दादा या भगवान का नहीं.भाजपा सांसद ने कहा कि इस रैली में प्रदेश के प्रत्येक जिले व गांव शहर से बड़ी तादाद में बहुजन मूलनिवासी समाज के महिला पुरुष शामिल हुए हैं.