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AMU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष की अपील ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम बदनाम मत करिए’

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नई दिल्ली – अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से पीएचडी कर रहे मन्नान वाणी को सेना ने मुठभेड़ में मार गिराया है। बता दें कि मन्नान इसी साल एएमयू से अपने घर के लिये गया था लेकिन वह अपने घर नहीं पहुंचा जिसके बाद सुरक्षा ऐजंसियों ने आशंका जताई थी कि मन्नान वाणी आतंकी संगठन हिजबुल से जुड़ गया है।

मन्नान वाणी की मौत पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुस्तान का संविधान हम हिंदुस्तानियों को इजाजत देता है कि हम आजादी के साथ सवाल कर सकते हैं। सरकार से पूछ सकते हैं कि अन्याय क्यों कर रही है या कोई अगर गायब हुआ है तो वह कहां है। हमने शुरू से नजीब को ढूंढने की जिस तरह मशक्कत की थी वैसे ही हम सरकार से यह भी सवाल कर रहे थे कि आपके पास अगर कोई सबूत है मन्नान वानी के मुजाहिदीन जॉइन करने के बारे में तो कोई ऐसा सबूत दे दीजिए जिससे यकीन हो जाए कि उसने आतंकवाद का रास्ता अख्तियार कर लिया है?

फैजुल ने बताया कि फिर हमने मीडिया के ज़रिए अपनी बात को मन्नान तक पहुंचाने के लिए साफ तौर पर दरख्वास्त की थी कि “अगर मन्नान मेरी बात तुमतक पहुंच रही है तो बस इतना कहना है कि एक प्रतिशत भी तुमने अगर हिजबुल मुजाहिदीन ज्वाइन किया है तो खुदा के वास्ते, एएमयू के वास्ते, सर सैयद के वास्ते, एक सच्चे मुसलमान के वास्ते, इंसानियत के वास्ते वापस लौट आओ सब छोड़ कर और जब आना तो उस इंसान को मौत के घाट उतार कर आना जिसने तुम्हें हिजबुल मुजाहिदीन के लिए उकसाया था और तुम उनसब आतंकियों को मौत के घाट उतार कर आना जो देश को तोड़ना चाहते हैं तब तुम्हारा हक़ इस इदारे के लिए अदा होगा” ।

उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार ने कोई ऐसा सबूत नहीं दिया। यह बस मीडिया के ज़रिये पता चलता रहा और आज जैसा कि पता चला कि हिंदुस्तानी सेना ने मन्नान वानी को मार दिया और यह बताया गया कि मुठभेड़ में आतंकवादी था, मारा गया। इस पर बस एक ही चीज है कि मैं पहले दिन से कहा था कि मैं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का छात्र हूं हिंदुस्तान का एक जिम्मेदार नागरिक हूं और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने कभी भी किसी आतंकवादी का, किसी गुंडे का, किसी बदमाश का कभी सपोर्ट नहीं किया।

फैजुल हसन ने कहा कि क्योंकि “यूनिवर्सिटी डॉक्टर, इंजीनियर बनाती है आतंकवादी नहीं बनाती”। उसने किसी को आज तक नहीं बताया था कि वह आतंकवाद का रास्ता अपनाने वाला रास्ता ढूंढ रहा है, किसी एक बंदे को भी नहीं पता था, लेकिन ये उसका अपना पर्सनल चॉइस था उसने वो रास्ता अपनाया और आज उस रास्ते को अपनाने की वजह से उसको सजा मिल गई।

 

उन्होंने कहा कि एएमयू में लोगों ने कुछ कहा एक वायरल हुआ एकदम हंगामा काटा, जनाज़े की नमाज़ होगी। मैंने जाकर उस चीज को पूरी हिम्मत के साथ विरोध किया, आपको किसी के लिए दुआ करना है, जनाजे की नमाज पढ़ना है तो कश्मीर में जाइये और मन्नान के घर पर जाइये, वहां से यहां पर आप इस मुद्दे को सियासी मत करिए, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम बदनाम मत करिए, क्योंकि वैसे ही इतना कुछ झेल चुकी है मेरा भी कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन मैंने दमदारी के साथ उसको रोकने की पूरी कोशिश की और मैं इस चीज को बिल्कुल मज़म्मत करता हूं कि आतंकवादी का कोई सपोर्ट न फैज़ुल हसन ने कभी किया है और न करेंगे। दूसरों से भी दरख्वास्त करूंगा कि ऐसे लोगों से बिल्कुल दूरी बना लीजिए।