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सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कुछ भी नहीं मान रहे सत्ताधारी भाजपा के सांसद, और हिन्दुवादी संगठनों के लोग

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गिरीश मालवीय

नई दिल्ली – उज्जैन के बीजेपी सांसद चिंतामणी मालवीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए कह रहे हैं कि रात 10 बजे के बाद भी जलाऊंगा पटाखे. जबलपुर के हिन्दू संगठन बोल रहे है कि हम तो नर्मदा नदी में ही प्रतिमाएं विसर्जित करेंगे कोर्ट के आदेश चाहे कुछ भी हो. सबरीमाला मंदिर में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण युवा महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रवेश नही दिया गया. कुछ दिन पहले दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गयीं मकान की सीलिंग तोड़ी थी. यानी सीधी बात है सत्ताधारी दल के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश कोई मायने ही नही रखता।

पेटीएम फिरौती विवाद

पेटीएम वाले विजय शेखर शर्मा का मामला उलझता जा रहा है. पहले विजय शेखर शर्मा का कहना था कि उससे 20 करोड़ पेटीएम कम्पनी से संबंधित जानकारी के मांगे जा रहे थे अब वह कह रहे है कि यह रकम उनकी निजी जानकारी के बदले मांगी जा रही है। गिरफ्तार सेकेट्री सोनिया धवन के वकील प्रशांत त्रिपाठी ने कहा है कि सोनिया धवन से भी पांच करोड़ रुपये की फिरोती मांगी गई थी जिसकी शिकायत सोनिया ने भी 15 दिन पहले थाना सेक्टर-39 में की थी,यदि ऐसा है तो उससे किस चीज के लिए पैसा मांगा जा रहा था ?

साफ है कि केस जितना सीधा नजर आ रहा है उतना सीधा है नही , जिस आदमी को ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है उस आदमी का कुछ पत्रकारों ने बयान लिया है. उस इंटरव्यू को आप देखेंगे तो आपको स्वयं लगेगा कि इस आदमी को मैटर की कोई जानकारी ही नही है।

सोनिया धवन कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट थी. उसकी तनख्वाह 70 लाख रुपये बताई जा रही है कम्पनी के 10 करोड़ के शेयर उसके पास है सारी प्रेस रिलीज उसी के नाम से होती थी, इतने बड़े पद पर बैठी महिला किसी ब्लैकमेल के केस में आसानी से इन्वॉल्व हो यह बात आसानी से हजम नही होती?

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)