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नज़रियाः हर एक लुटेरा देश का खजाना लूटकर विदेश भाग  जाता है, आप कैसे ‘चौकीदार’ हो साहेब?

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इस्लाहुद्दीन अंसारी

“आप लोग मुझे प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार बनाएं और मैं देश के खजाने पर कोई भी पंजा नहीं पड़ने दूंगा” यही वो शब्द थे जिसे सुनकर देश की जनता ने आप के हाथों देश की निगरानी सौंपने का फैसला किया था की चलो कम से कम आपने इतनी बड़ी बात कही है तो एक बार आपकी उस बात का भरम रख कर देखा जाए। भृष्टाचार और काले धन पर किये गए आपके वादे को निभाने के लिये एक मौक़ा दिया जाए।

शायद इसीलिए जनता ने आप पर विश्वास किया। दिल खोलकर आप पर वोटों की बारिश हुई की चलो अब अच्छे दिन आ जाएंगें, देश के खजाने पर अब कोई पंजा नहीं मारेगा, भृष्टाचार पूरी तरह खत्म हो जाएगा, विदेशों में जमा देश का पैसा (कालाधन) वापस आ जाएगा, सबके खातों में 15 लाख़ रुपये आ जाएंगे और स्थितियां बेहतर हो जाएंगी।

पर हुआ एकदम उल्टा और हुआ ये की आपकी चौकीदारी में लुटेरों ने देश के खजाने पर पंजा मारने के साथ साथ पंजा मारने के बाद भागने में भी कामयाब होने लगे। विजय माल्या आपकी नाक़ के नीचे से फ़रार हो गया आप हाथ मलते रह गये। निरव मोदी दावोस में आपके साथ नज़र आया, सुना है उसकी आपके साथ मीटिंग भी हुई।

उसने भी देश की जनता के पैसे पर दोनों हाथों से पंजा मारा आप हाथ में चौकीदारी का डंडा लिये देखते रहे। पंजा मारने के बाद वो भी आपकी नाक़ के नीचे से रफूचक्कर भी हो गया आप तब भी कुछ नहीं कर पाए। मतलब साफ़ है या तो आप अपनी जिम्मेदारी निभाने में चूक कर रहें हैं या फिर आपने खुद चोरों को खजाने पर पंजा मारने की खुली छूट दे रखी है की आओ भाई जिसे जितना चाहिए ले जाओ हम कूछ नहीं देखेंगे/सुनेंगे/बोलेंगे।

आपकी चौकीदारी में सफ़ेद पोश चोर और लुटेरे खजाने पर पंजे पर पंजा मारे जा रहे हैं तब ऐसे में आपको देश की जनता को ये बताना चाहिए की आपकी चौकीदारी का फायदा क्या हुआ की अब भी लूट, खसोट, भृष्टाचार निरंतर बड़े पैमाने पर ज़ारी है। और अब तो चोर और लुटेरे सुकून से लूट करने के बाद देश से कुशलतापूर्वक बाहर भागने में भी कामयाब होने लगे हैं।

भृष्टाचार पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को आतंकित करने वाले इन आर्थिक आतंकवादियों पर किसी तरह का अंकुश लगाने में बुरी तरह नाकामयाब हुए हैं आप। ऐसे में आपको देश से माफ़ी मांगनी चाहिए की आपने चौकीदार की जिम्मेदारी का ठीक तरीक़े से निर्वहन नहीं किया है और आपकी नाक़ के नीचे तमाम तरह लूट और खसोट बदस्तूर जारी है।

स्मार्ट सिटी के ख़्वाब दिखाए गए। मेक इन इंडिया का शोर मचाया गया। भारत को डिजिटल भारत भी बनाने की धुन सवार रही। कैशलेस की उधेड़बुन भी सबने देखी। भृष्टाचार मुक्त भारत बनाने का दावा भी किया गया। गोया की सारी बड़ी बड़ी बातें बस बातों बातों में ही बताई जाती रही, की ये होगा, ऐसा होगा, ऐसा किया जाएगा, ऐसा करने जा रहें हैं पर इन सब का हासिल जो हुआ वो पूरे देश ने देखा।

डिजिटल इंडिया के नाम पर बड़े सेठ का जिओ बेचा जाने लगा। मेक इन इंडिया का जूमला बोलकर जापान के साथ बुलेट ट्रेन का करार कर लिया गया। कैशलेस इकोनोमी के नाम पर पेटीएम का जोर शोर से प्रचार हुआ। भृष्टाचार मुक्त भारत के नाम पर विजय माल्या और निरव मोदी नाम के दो भगोड़े मिले। आख़िर में जो हाथ आया वो थी बस बातें बातें और बातें।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)