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NIA द्वारा संदिग्धों की गिरफ्तारी और सवालः तो सोशल मीडिया पर की गई बेवकूफी आपको ‘आतंकी’ बना देती है?

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मोहम्मद अनस

NIA ने कल कुछ लड़कों को यूपी/दिल्ली से आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया है। विभिन्न अख़बारों तथा वेबपोर्टल्स पर जिन नामों का ज़िक्र है उन नाम से बनी प्रोफाइल खोजने पर एकमात्र ज़ैद मलिक की प्रोफाइल ही दिख पाई मुझे। ज़ैद मलिक की प्रोफाइल की कुछ ख़ास बातें-

  • उसने हाल ही में या कुछ महीने पहले ही दाढ़ी रखी है।
  • वह फेसबुक पर धार्मिक मामलों में पोस्ट तथा कमेंट किया करता था, यूं कहिए कि उसके नब्बे फिसदी पोस्ट कथित इस्लामिक हुआ करते थे। जैसे कि – हजरत ईसा (यीशू मसीह) के जन्मदिन पर क्रिसमस मनाना हराम है।
  • उसकी प्रोफाइल में कम से कम तीस फीसदी लोग नकली थे। उनमें भी ज्यादातर लड़कियों के नाम से बनी प्रोफाइल हैं। और अजीब इत्तेफाक है कि उन प्रोफाइल पर भी सिर्फ धार्मिक पोस्ट ही आते हैं।
  • फेक आईडी जो कि महिलाओं के नाम से बनी है उनमें से अधिकतर में मेरे 50 से ज्यादा म्यूचुअल हैं। और से पचासों मुसलमान फेसबुकिया मित्र हैं।
  • ज़ैद मलिक ने दाढ़ी रखी, बेशक वह नमाज का पाबंद हो गया होगा लेकिन उसने सोशल मीडिया पर इसको बहुत प्रचारित किया। अचानक से उसके भीतर यह बदलाव किन कारणों से आया, उसकी पड़ताल करने पर ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया पर वह अपनी पोस्ट में जिन महिलाओं को हर बार टैग कर रहा था वह वही फेक प्रोफाइल थीं। क्या उनसे प्रभावित होकर वह यह सब कर रहा था? यदि हां तो NIA उन प्रोफाइल्स की पड़ताल करे।
  • सुरक्षा एजेंसियों के पास इतना कुछ होता है कि वह अच्छे अच्छों को ट्रैप कर ले। फेक आईडी के माध्यम से इस्लाम/मुसलमान करने वालों/वालियों को अपनी लिस्ट में जगह देना बंद करें।
  • हो सके तो लौंडियाबाज़ी बंद करें। लड़कियों से गप्प करने का बहुत मन है तो साथ में पढ़ी लिखी या साथ काम की महिलाओं से ही बात करें। जिनको नहीं जानते उनसे बचें। ऐसी लड़कियां आपके दाढ़ी भी रखवा देंगी और NIA बन कर उठवा भी देंगी।

वैसे भी मेरी क़ौम के बेवकूफ नौजवानों, फेसबुक पर जिस इस्लाम की शिक्षा तुम देते फिरते हो, क्या बस वही इस्लाम है? हज़रत निज़ामउद्दीन औलिया क्या मुसलमान नहीं थे? उनके दर पर हिंदुओं की भीड़ लगती रही हमेशा से। क्या मौलाना अबुल आला मौदूदी मुसलमान नहीं थे? वे भी तो हिंदुस्तान में पैदा हुए और काम किया। आला हज़रत से लेकर मौलाना अशरफ अली थानवी तक यहीं पैदा हुआ और यहीं दफ्न हो गए। हमसे ज्यादा पढ़े लिखे और क़ाबिल मुसलमान इस देश में हैं। तुम कब समझोगे कि अगर अल्लाह पाक को हिंदुओं, ईसाईयों, बौद्धों से नफरत होती तो वह इन्हें बनाता ही क्यों? जिसने पैदा किया उसने नफरत नहीं की।

अल्लाह ही के फज्ल ओ करम से हिंदुओं की बड़ी बड़ी कंपनियां हैं। हजारों करोड़ का कारोबार है। अल्लाह पाक न चाहते तो ये सब हो जाता क्या ? नहीं न। फिर मुझे समझ नहीं आता कि तुम्हारे चाहने से क्या हो जाएगा। अल्लाह ने सबको बराबर पैदा किया। हम सब इंसान दुनिया की सबसे खूबसूरत क्रिएशन हैं। समझदार हैं। फिर दिन रात धर्म के मामले में एक दूसरे को नीचा ऊंचा दिखा कर क्या मिलता है। फिरक़े के नाम पर लड़ कर क्या हासिल होता है। एजेंसियों की नज़र ऐसे ही लोगों पर पड़ती है। फिर वह उनसे अपने स्लीपर सेल के माध्यम से संपर्क करती है और क़ौम के बेवकूफ नौजवान तुरंत ट्रैप हो जाते हैं।

तुम इस्लाम की मदद न करो। जिस खुदा ने दुनिया बनाई है। वह इस्लाम की मदद कर लेगा। तुम अपनी ही मदद कर लो सबसे पहले। पढ़ लिख लो। अच्छा बिजनेस कर लो। आस पड़ोस की मदद कर लो। उतना ही कर लो। वही बहुत है। बाक़ि ज़ैद मलिक और उसके साथ पकड़े गए मुस्लिम नौजवान आतंकवादी भले न हो, बेवकूफ तो हैं ही।

(लेखक युवा पत्रकार हैं, एंव सोशल मीडिया विशेषज्ञ हैं, ये उनके निजी विचार हैं)