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मोदी सरकार की नई योजना, अब मध्यम वर्ग और दोपहिया वाहन चलाने वालों की ज़ेब पर है निशाना

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गिरीश मालवीय

मध्यम वर्ग पर मोदी सरकार अब एक बम फोड़ने वाली हैं यह बम दोपहिया वाहन चलाने वालों पर फूटेगा, आप जो ISI मार्का हेलमेट 800 से 2 हजार रुपये में खरीद लेते थे उनकी कीमत अब कई गुना बढ़ने वाली हैं आने वाले दिनों में एक हेलमेट की कीमत 5 से 10 हजार रुपए होगी, जो कि एक आम टू-व्हीलर चालक के एक महीने के पेट्रोल खर्च से भी ज्यादा हैं। एक अनुमान के मुताबिक इंडिया में टू-व्हीलर हेल्मेट्स की अनुमानित डिमांड लगभग 9 करोड़ प्रति वर्ष की है यानी एक हेलमेट यदि 5 से 10 हजार रु का बेचा जा रहा है तो खुद अनुमान लगाइए कि यह कितना बड़ा बिजनेस होने जा रहा है.

ओर जो सस्ते हेलमेट आप सड़क किनारे से खरीद रहे थे उसे तो अब आप भूल ही जाइये! क्योंकि बिना आईएसआई हेलमेट बनाना और बेचना प्रतिबंधित कर दिया गया है. जो भी व्यक्ति या कंपनी इस तरह के बिना ISI मार्क वाले हेलमेट बेचते पाए गए उन्हें बिना वॉरंट के हिरासत में लिए जाने का अधिकार होगा और पहली बार मुजरिम करार दिए जाने पर 2 साल की जेल या 2 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। 2019 मे बिना ISI मार्क वाले हेलमेट बेचना एक दंडनीय अपराध होगा. सभी हेलमेट निर्माताओं के लिए अपने हेलमेट के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) से इंडियन स्टैंडर्ड्स का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया है.

दरअसल सरकार ने साल 1993 के भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) नियमों में बदलाव करके नए 2015 यूरोपियन मानक को लागू किया है ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने हेलमेट के लिए नए मानक तय किये हैं, नए नियमों के मुताबिक अगले साल से हेलमेट 1.2 किलोग्राम के होंगे। ये नए नियम 15 जनवरी 2019 से लागू किये जाने की बात की जा रही हैं.

हेलमेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री सुभाष चंद्रा बता रहे हैं कि पुराने नियमों के तहत हेलमेट फैक्ट्री के साथ ही एक टेस्टिंग लैब बनानी होती थी, जहां इनका परीक्षण किया जाता था। इस लैब पर 6 से 7 लाख रुपए का खर्च आता था। हालांकि अब नए नियमों के अंतर्गत यूरोपियन टेस्टिंग लैब लगानी होगी। इस पर 1 से 2 करोड़ का खर्च आएगा। ऐसे में एक एक स्मॉल स्केल उद्योग चलाने वाले के लिए नई लैब लगाना संभव नहीं होगा इससे स्मॉल स्केल हेलमेट उद्योग बंद हो जाएंगे। इससे लाखों लोगों को बेरोजगार होना पड़ सकता है. नए मानकों के हिसाब से हेलमेट मैन्युफैक्चरिंग का काम कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रह जाएगा। ऐसे में ये कंपनियां मनमाफिक दाम पर हेलमेट की बिक्री करेगी, ओर अपनी सुरक्षा के नाम पर आप यह पैसा चुकाने को आसानी से तैयार हो जाएंगे.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)