Home पड़ताल नज़रियाः मुग़ल भारत में आए यहीं राज किया और यहीं की मिट्टी...

नज़रियाः मुग़ल भारत में आए यहीं राज किया और यहीं की मिट्टी में दफ्न हो गए, फिर वे लुटेरे कैसे हो गए?

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नज़ीर मलिक

आक्रांता की परिभाषा क्या है? जब किसी देश पर हमला कर कोई राजलूट पाट कर वापस चला जाये तो उसे आक्रांता कहते हैं, दूसरी तरफ जब को हमलावर जीत के बाद विजित देश की मिट्टी में रच बस जॉय तो वो देश का नागरिक हो जाता है। इस लिहाज से सिकनदर, मो. बिन कासिम, गज़नी, सासानी, आदि भारत मे आक्रांता थे और आर्य, ममलूक, मुगल आदि सेटलर थे। ये शरणार्थी भी नही थे।

मुगलो, ममलुकों ने भारत को अपना लेने के बाद कभी अपनी मूल भूमि को पलट कर नही देखा। यहीं राज किया, यहां के धन से इमारते, नहरें, सड़कें अस्पताल बनाये।यहां का धन यही खर्च किये। इसके बाद भी एक साम्प्रदायिक जमात मुगलो, ममलूकों को डाकू कहती है। डाकू माल लूटते हैं, लेकिन एक सवाल करता हूँ कि की यहां ममलूक सरदार मो तुगलक के दादा ने कुतलुग मालिक ने पहली शादी हिन्दू रानी से की, लेकिन जबरिया नही। उसके बेटे रजब यानी फ़िरोज़ तुगलक के पिता ने भाटी राजकुमारी नैला सेविवाह किया वो भी सर्ब्सम्मत से।उसके बाद अकबर से लेकर मुअज़्ज़म तक इन शादियों का लंबा इतिहास है, जिसमे कोई ज़ोरज़बर्दस्ती नही हुई। यहां तक की औरँगज़ेब कि शादी डोंगरा राजकुमारी नवाब बाई से हुई, लेकिन राजी खुशी से।

पानीपत की लड़ाई में अकबर ने जीत के बाद राजा विक्रमजीत के परिजनों से कोहिनूर हीरा प्राप्त किया, लेकिन उसे अपने मूल वतन फरंगना नही भेजा। वरन तब तक रहा, जब तक कि आक्रमणकारी नादिर उसे लूट कर नही ले गया। ये वही लोग हैं जिनके नवाब सिराज अंग्रेज़ो को भारत से खदेड़ने की तैयारी में लगा था,परंतु भारत के बड़े बनिये सेठ जगत बन्धुओं, व दुर्लभ राय ने मीरकासिम को मदद कर सिराजुद्दौला की मौत का सौदा किया। यही नही इन्ही साम्प्रदायिक तत्वों ने अंग्रेज़ोसे मिलकर टीपू सुल्तान की हत्या कराई। टीपू दुष्मनिमे मराठे श्रृंगेरी मठ तक जलाने से नही चुके।

कथा लंबी है। आप किसी मुगल या मुस्लिम शासक की आलोचना तो कर सकते हैं, मगर सम्पूर्ण मुगल को डाकू कैसे कह सकते हैं, ये तो वैसे ही होगा, जैसे सेठ जगत बंधु के विश्वासघात के कारण सम्पूर्ण वैश्य समाज को विश्वासघाती कह दिया जाय। मूल प्रश्न ये है कि मुगल डाकू कैसे थे? अगर वे डाकू होते तो उनके वंशज आज निज़ाम, सिंधिया आदि की तरह होते।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)