Home Uncategorized तो पाकिस्तान को सबक ऐसे सिखा सकते हैं…

तो पाकिस्तान को सबक ऐसे सिखा सकते हैं…

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पुलवामा में बड़ी शहादत के बाद पाकिस्तान पर हमला कर उसे नेस्तनाबूद करने कि मांग एक बड़ा वर्ग कर रहा है। इस मुहिम में दो तरह के लोग शामिल हैं। एक तो वे जो बहुत दुखी, मगर भोले लोग है, जिन्हे राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय हालत की वास्तविक जनकारी नाही है, दूसरे वे लोग जो बहुत शातिर हैं, जो लोगो की भावनाओं को भड़का कर उनका रुख किसी खास राजनीतिक दल की तरफ मोड़ने की मुहिम में लगे हैं।

भारत पाकिस्तान का युद्ध अब कोई परिणाम देने वाला नहीं है। दोनों देश परमाणु संपन्न हैं। विश्व की वीटो पावर महाशक्तियों में तीन में दो पाकिस्तान के साथ और एक भारत के खेमे में है, वो भी आधे अधूरे मन से। बाकी न्यूट्रल हैं। युद्ध छिड़ने पर बीच में युद्ध विराम तय है। धन की बरबादी होगी तो भारत का विकास प्रभावित होगा। पाकिस्तान तो भीख और चनदे से चलने वाला मुल्क है, उसका कुछ खास नहीं बिगड़ने वाला। पाकिस्तान इसे खूब समझता है

इसके बजाय पाकिस्तान की आर्थिक नाके बंदी कर उसको तोड़ना ज़्यादा उचित है।पाकिस्तान को मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा बन्द कर तथा सारे व्यापारिक समझौते रद कना होगा। भारत के अदानी, अंबानी जैसे उद्योगपतियों को अपने प्रोजेक्ट भी वहा से हटाने होंगे। इसके अलावा भारत को कुछ मित्र देशों से वार्ता कर उनको पाकिस्तान से अलग करने की मुहिम चलाने होगी, तब ही पाकिस्तान को घेरा का सकता है।

सबसे बड़ी बात है कि अपने मोदी जी को भाषण छोड़ कर सटीक कूटनीतिक चाले चलनी होंगी। आपको पिछली सर्जिकल स्ट्राइक याद करनी होगी। दुनियां का कोई देश सर्जिकल स्ट्राइक का प्रचार नहीं करता। वो उस देश में चुपचाप कार्रवाई कर दुश्मन देश को अतांकित कर एक कड़ा संदेश देता है। ऐसा पूर्व में भारत भी करता रहा है, लेकिन अपने पी एम ने सर्जिकल स्ट्राइक का जम कर प्रचार किया। पोस्टर लगवाए, फिल्म भी बनी। राजनीतिक लाभ के लिए मोदी जी के इस प्रचार को पाकिस्तान ने चुनौती के रूप में लिया। उसने भी अपनी जानता की भावनाएं संतुष्ट करने का काम किया, जिसकी परिणीति उरी और पुलवामा की घटना के रूप में सामने आईं।

प्रधानमन्त्री जी को जानना चाहिए कि देश के विदेशी मामले भाषण से हल नहीं होते। इन्होंने गत चुनाव में मनमोहन सिंह को कहा था कि सीमा पर फौज आपकी है, अतंकवादी कैसे अा जाते है। दूर संचार आपका है आतंकी बातचीत कैसे कर लेते है। वित्तीय आदान प्रदान पर कंट्रोल आपका है फिर आतंकियों को फंडिंग कैसे हो जाती है? आज मोदी पी एम हैं, यही सवाल उनके सामने है। अब तो समझ में अा गया होगा कि अंतरराष्ट्रीय साजिशें कैसे होती है।

देश की जानता को भी जानना चाहिए कि मोदी जी जिस पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने की घोषणा करते फिर रहे थे वे आज उस पर हमला क्यों नहीं कर पा रहे? ज़ाहिर है सच इस सोच से हटकर है।इसलिए देश के लोगों को युद्ध उन्माद की बात छोड़ कर इस मसले पर राजनीतिक ढंग से विचार करना चाहिए। याद रखिए..

जंग मसले का हल नहीं होती,

जंग तो खुद ही एक मसला है।

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