Home विशेष रिपोर्ट नट समुदाय से सीखिए कट्टरपंथ और धार्मिक उग्रता को हराने का हुनर

नट समुदाय से सीखिए कट्टरपंथ और धार्मिक उग्रता को हराने का हुनर

SHARE

निसार सिद्दीकी

नट समुदाय। उत्तर भारत में यह जाति खानाबदोश कही जाती है। यह एक जगह से दूसरे जगह पर पूरे खानदान के साथ कैंप लगाकर घूमते रहते हैं। ना कोई स्थाई ठिकाना होता है ना ही कोई ठोस रोज़गार। इनके कमाने खाने का ज़रिया जड़ी-बूटी की दवाएं बेचना, मज़दूरी और पशुपालन है। कहीं कहीं जगहों पर इनका पूरा गांव भी है। जहां इनका पूरा कुनबा यानी खानदान रहता है। नट समुदाय सामाजिक श्रेणी के हिसाब से अनुसूचित जनजाति में आते हैं।

देश में जब समाज में हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति हो रही है और लोग एक दूसरे के दुश्मन इस बात पर हो रहे हैं कि सामने वाला हिन्दू या फिर मुस्लिम है, तो ऐसे में नट समुदाय का ज़िक्र आज के परिवेश में करना बहुत ज़रूरी हो गया है। नट समुदाय में हिन्दू और मुस्लिम दोनों होते हैं। नट समुदाय का दो गांव मेरे गांव प्रभुपुर के ठीक बगल में है। एक का नाम खोनपुर और दूसरे गांव का नाम सीवाने है। नट समुदाय की एक शादी में अब्बू के साथ जाने का मौका मिला। वह शादी नट समुदाय के चौधरी के घर पर थी।

उनकी दोनों बेटियों की शादी थी। मैंने शादी में देखा कि एक तरफ वरमाला का इंतजाम हो रहा है तो दूसरी तरफ निकाह का। मैंने अब्बू से पूछा की मामला क्या है। तो अब्बू ने बताया कि एक बेटी की शादी हिन्दू के घर हो रही है तो दूसरी की शादी मुस्लिम के घर में। मुझे बड़ी हैरानी हुई। फिर शादी देखा तो वाकई एक की शादी हिन्दू रीति-रिवाज से हुई तो दूसरी की शादी मुस्लिम रीति रिवाज से।

यह नट समुदाय ऐसे ही रहते हैं। हिन्दू घर में शादी करने वाली लड़की मुस्लिम घर में ब्याही अपने बहन के घर जाती है। फिर इन दोनों के घर में रिश्ता होता है। इनकी बेटी उनके घर ब्याही जाती है। ये हिन्दू और मुस्लिम नट आपस में इतना घुले-मिले हैं कि क्या हिन्दू क्या मुस्लिम। नट समुदाय में दंगा-वंगा नहीं होता। क्योंकि इनके यहां हिन्दू-मुस्लिम की बाइनरी ही नहीं है। इस जाति में दो लोगों के बीच झगड़ा होता है तो चौधरी पंचायत कर मामला सुलझा देता है

पढ़े-लिखे और सो कॉल्ड प्रोग्रोसिव लोग नट समुदाय का इस्तेमाल गाली के तौर पर करते हैं। बनारस और आस-पास के इलाकों में गाली इस प्रकार से देते हैं, 1- नट हउवे का रे? 2- नटन के तरह काहे हउवे? 3-नटन नियर चिल्लात हव। मगर आज के दौर में यही प्रोग्रोसिव लोग हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर माहौल भड़काने की कोशिश करते हैं। अफसोस ये प्रोग्रोसिव लोग जिस नट समाज को गाली के तौर पर लेते हैं वह आज नट समाज से काफी नीचे गिर गए हैं।

(लेखक जामिया मिलिया इस्लामिया विश्विद्यालय में रिसर्च स्कॉलर हैं)