Home पड़ताल सोनू निगम भी “नफरती चिंटू” ही निकला

सोनू निगम भी “नफरती चिंटू” ही निकला

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नितिन ठाकुर

सोनू निगम को कुछ दिन पहले अज़ान से दिक्कत थी। जब शोर मचा तो अपना नफरती चेहरा ये कह कर छिपा गया कि दिक्कत मुझे लाउड स्पीकर से है। आज मगर खुलासा हो गया कि ये आदमी “नफरती चिंटू” ही था और हमने इसे सही पहचाना था। ये आदमी अपने ताजा वीडियो में अमिताभ बच्चन के स्टाइल की सस्ती कॉपी करते हुए धर्मनिरपेक्ष लोगों पर तंज़ कस रहा है। अगर इस फेल हो चुके और अब बाबुल सुप्रियो की राह पर चलने को मचलते गायक में रीढ़ हो तो उसे नाम लेकर बताना चाहिए कि किस धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति को सीआरपीएफ के जवानों के शहीद होने का दुख नहीं है?

“अफजल हम शर्मिंदा हैं” और “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे नारे लगानेवाले सेक्युलर हैं ये ज्ञान सोनू निगम ने किस से लिया है? घुमा फिराकर सिर्फ संघ, बीजेपी, हिंदूवादी संगठनों को देशभक्त बताकर ये आदमी किसे गद्दार ठहराने की कोशिश कर रहा है? पाकिस्तान की शह पर जैशे मोहम्मद ने अगर हमारे जवानों को शहीद किया तो इसमें इस देश के धर्मनिरपेक्ष लोगों पर चढ़ बैठने का क्या तुक है या फिर गैर संघी, गैर भाजपाई, गैर हिंदूवादी संगठनों को निशाना बनाना कैसे वाजिब हो गया? उसे तो शायद पता ना हो मगर मैं याद दिला दूं कि जैश के सरगना को इसी सत्तासीन भाजपा की पहली सरकार इज्जत के साथ कंधार छोड़कर आई थी। आज वही कभी जम्मू-कश्मीर विधानसभा, कभी देश की संसद, कभी पठानकोट, कभी उरी, कभी पुलवामा पर धावे बोल रहा है। मैने तो इस मुल्क में किसी को नहीं देखा जो कभी मसूद अज़हर के समर्थन में खड़ा हुआ हो। उसने देखा हो तो नाम लेकर बताए।

मैं नहीं मानता अगर कोई कहे कि हिंदूवादी संगठनों को जवानों की मौत का ग़म नहीं। मैं नहीं मानता कि कोई कहे कि कश्मीर में मुख्यधारा की राजनीति करनेवालों को पुलवामा का ग़म नहीं। मैं नहीं मानता कि कोई कहे मोदी या राहुल को ग़म नहीं। कम से कम ऐसे किसी भी मौके पर हम में से किसी को भी किसी की नीयत और संवेदना पर सवाल उठाने से बचना चाहिए और अगर सवाल है तो फिर आधार भी मज़बूत हो।

जिसमें ज़रा भी इंसानियत होगी वो हिंसा पर दुखी ज़रूर होगा लेकिन ये सोनू निगम क्यों जामे से बाहर हो रहा है? अगर वाकई इस इंसान में किसी से बदला लेने की आग भड़क रही है तो बंदूक लेकर एलओसी पर चढ़ बैठे मगर अपने ही देश के लोगों पर जैश की हरकत का गुस्सा क्यों उतार रहा है? क्यों ये चुनाव से पहले संघ का एजेंडा गर्म कर रहा है?

धर्मनिरपेक्षता को गाली देने से पहले सोनू निगम जैसों को देश के संविधान, गांधी-नेहरू-अंबेडकर का दर्शन और इस मुल्क की मिलीजुली तहज़ीब समझ लेनी चाहिए। सिर्फ सस्ते न्यूज़ चैनल और उन पर जोश में हांफते कथित राष्ट्रवादी प्रवक्ताओं को सुनकर आदमी ऐसे ही संतुलन खो देता है। बहुत बीमार सोनू निगम और उसके नफरती चिंटू फैन्स के संग मेरी सहानुभूति है लेकिन एक विनती भी है कम से कम इस मौके को देश के मुसलमानों और धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल ना करें। फिर से खबरों में आने के कई मौके आगे मिल जाएंगे। सब्र रखें। देश दुख में है, उसे भड़का कर आपस में ना लड़ाएं।

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