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खुलासाः हटाए गए CBI निदेशक आलोक वर्मा शुरु कर चुके थे राफेल पर दायर अर्जी का सत्यापन, जल्द होने वाला था फैसला

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तसलीम खान

नई दिल्ली – जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टरआलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सीवीसी और केंद्र दोनों के खिलाफ जो अर्जी दी हैउसमें उन्होंने कहा है कि उनके पास जो मामले थे वे काफी अहम थे और उनकी जांच कीआंच कई महत्वपूर्ण हस्तियों की तरफ जा सकती थी.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आलोक वर्मा ने कहा है कि ये मामले बेहद संवेदनशील हैं, शायद इन्हीं मामलों की वजह ये हालात पैदा हुए हैं. वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि कई आला हस्तियों के खिलाफ जांच उस दिशा में नहीं जा रही थी, जिस दिशा में सरकार चाह रही थी.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राफेल सौदे से लेकर मेडिकल काउंसिल रिश्वत केस और कोयला घोटाले में एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ जांच से लेकर स्टर्लिंग बायोटेक तक, कई ऐसे मामले थे जिसमें सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर पद से हटाए गए राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच जारी थी.

सुप्रीम कोर्ट में दायर आलोक वर्मा की याचिका में कहा गया है कि उनके पास कई अहम माले थे जो काफी संवेदनशील थे. सुप्रीम कोर्ट में दायर आलोक वर्मा की याचिका में कहा गया है कि उनके पास कई अहम माले थे जो काफी संवेदनशील थे.सूत्रों के मुताबिक जो अहम केस आलोक वर्मा के पास थे उनमें सबसे महत्वूर्ण है राफेल सौदे में अनियमितताएं बरतने और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाती अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की अर्जी. सूत्रों का कहना है कि चार अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर को सौंपी गई 132 पन्नों की इस अर्जी पर वेरिफिकेशन का काम शुरु हो चुका था. सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इस पर कोई फैसला होने वाला था.

इसके अलावा आलोक वर्मा के पास मेडिकल काउंसिल रिश्वत कांड का मामला भी था. इस मामले में कई आला हस्तियों के फंसे होने की आशंका है. इस केस में हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज आई एम कुद्दूसी पर आरोप हैं. सूत्रों का कहना है कि इस मामले की चार्जशीट तैयार हो चुकी थी और आलोक वर्मा उस पर हस्ताक्षर करने वाले थे.एक और महत्वपूर्ण केस जो आलोक वर्मा के पास था वह था बीजेपी सांसद सुब्रहमण्यम स्वामी का पत्र जिसमें वित्त और राजस्व सचिव हसमुख अधिया के खिलाफ शिकायत की गई थी.

सभार नवजीवन