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NIA द्वारा हुई गिरफ्तारी पर वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने उठाए सवाल, पूछा, ‘ISIS अब देसी कट्टे और दिवाली के सुतली बम पर उतर आया है?’

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नई दिल्ली – राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा, हापुड़ से कई युवाओं को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप लगाया है कि ये लोग खूंखार आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़े हुए थे। इतना ही नहीं एनआईए ने इनके पास विस्फोटक भी बरामद दिखाया है, साथ ही रॉकेट लांचर भी दिखाया है। अब इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने इन गिरफ्तारियो पर सवाल उठाते पूछा है क्या अब आईएसआईएस सुतली बम का प्रयोग करेगा।

दस मिनट दीजिये सुतली बम थ्योरी को समझने के लिए:

2007 की घटना है दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले और लोकप्रिय बाज़ार दिल्ली हाट में रेड की और RDX और लाइव डेटोनेटर्स के साथ तीन को गिरफ्तार किया. ये अद्‌भुत रेड आठ घंटे चली जिसमे 20-25 पुलिस वाले शामिल बताए गए. मज़े की बात है कि स्पेशल सेल की इस आठ घंटे की रेड की हवा तक नहीं लगी दिल्ली हाट के ठीक बाहर खड़ी PCR वैन को. पुलिस कंट्रोल रूम में उस दिन कुछ मामूली झगड़ों की खबर तो आई पर फिदायीन, RDX, डेटोनेटर उसे किसी ने नहीं बताया. और तो और पुलिस की जो टीम रेड कर रही थी उनमे एक के पास भी बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं था. बम निरोधक दस्ता भी नहीं बुलाया गया.

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के बहादुर जवान RDX, लाइव डेटोनेटर और अभियुक्तों को जिप्सी में बिठा कर थाने ले आए. पांच साल मुकदमा चला और 2012 में सभी बरी हो गये. पुलिस को मालूम होता है उसकी गढ़ी हुई कहानी अदालत में नहीं टिकेगी पर पांच – दस साल वो कुछ लोगों के खराब कर सकती है. सत्ता में बैठे लोगों को इन गढ़ी हुई कहानियों के कई फायदे मिलते हैं. जिनमे कुछ इस प्रकार हैं: समाज में दहशत का माहौल बने रहने से लोग असल मुद्दों की बात कम करते हैं. भ्रष्टाचार से ध्यान हटा रहता है. राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर नागरिक अधिकारों को कम या ख़त्म करने पर विरोध तो दूर की बात है – जनता खुद सहयोग देती है.

शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरे ज़रूरी बजट में कटौती कर बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने पर जनता सवाल नहीं खड़े करती है. हथियारों की खरीद में मोटा कमीशन मिलता है. सिर्फ एक वर्ग को टार्गेट करने से समाज खानों में बंट जाता है. सामूहिक प्रतिरोध की गुंजाइश कम होती है और चुनाव में फसल भी अच्छी कटती है. कुछ पुलिस वालों को बख्शीश के तौर पर मेडल और प्रमोशन भी मिल जाता है. अगली बार जब मेट्रो में सफर करे और स्पीकर से ये चेतावनी सुने कि “किसी लावारिस बैग को देखे तो पुलिस को तुरंत सूचित करे ये बम हो सकता है” तब थोड़ा सोचियेगा कि राज्य आपको हमेशा किसी दहशत में क्यों रखना चाहता है.