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गंगा सफाई के लिये 111 दिन से अनशन कर रहे स्वामी सानंद के निधन से खुली BJP के झूठे वादों की पोल

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पंकज चतुर्वेदी

गंगा सफाई  को लेकर 111 दिन अनशन करने वाले स्वामी सानंद का आज निधन हो गया। कल ही यानि 10 अक्टूबर को प्रशासन ने ज़बरदस्ती उन्हें अनशन से उठा दिया था। मातृ सदन प्रमुख स्वामी सानंद भूल गए थे केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार है। ऐसे में न हेडलाइन्स में आएंगे और न उनकी मांग पूरी होगी। अविरल और निर्मल गंगा के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का दोपहर को एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। बुधवार को स्वामी सांनद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि स्वामी सांनद ने मंगलवार को ही जल त्याग दिया था। वह 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे।

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानन्द (जन्म 20 जुलाई 1932) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणप्रेमी थे । उनका मूल नाम जी डी अग्रवाल था। सम्प्रति वे महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक (ऑनरेरी प्रोफेसर) हैं। २००९ में भागीरथी नदी पर बांध निर्माण रुकवाने के लिये उन्होने अनशन आरम्भ किया था जो सफल रहा।

वे आई आई टी, कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में प्राध्यापक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार रह चुके हैं। बता दें कि पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल गंगा की सफ़ाई को लेकर हरिद्वार में आमरण अनशन पर बैठे थे। बाद में उन्हें जबरन एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया गया था। भर्ती होने के बावजूद प्रो अग्रवाल अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। इस पूरे मुद्दे को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में उठाने की बात भी की थी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती पत्र लिखकर प्रो. जीडी अग्रवाल को मनाने की कोशिश कर चुके थे।

इसके जवाब में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने फ़रवरी में प्रधानमंत्री मोदी को गंगा की सफ़ाई के लिए पत्र लिखा था, जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने आमरण अनशन पर जाने का निर्णय लिया। आमरण अनशन की जानकारी 13 जून को प्रधानमंत्री को लिखकर दी गई थी। उमा भारती स्वामी सानंद को अपना बड़ा भाई कहती रही थी इसलिए पत्र के अंत में स्वामी सानंद ने लिखा था कि ‘अगर जीवित रहा तो रक्षाबंधन में याद कर लेना’।

इससे पहले वह 2009 में भागीरथी पर डैम बनाने को रोकने के लिए भी सफ़ल अनशन कर चुके थे। बता दें कि स्वामी सानंद सन्यास लेने से पहले सीपीसीबी के पहले मेंबर सचिव रह चुके हैं जबकि पर्यावरण वैज्ञानिक के रूप में वह आइआइटी कानपुर सहित विभिन्न संस्थानों में अध्‍यापन कर चुके हैं।

अभी १२ जुलायी को हरिद्वार मातृ सदन के स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की पुलिस गिरफ्तारी मामले में नैनीताल हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था । हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को आदेश दिए थे कि वह 12 घंटों के भीतर स्वामी से मिलकर उनकी मांगों को पूरा करें। इसके साथ ही उस जगह को भी सार्वजनिक किया जाए जहां स्वामी ज्ञानस्वरूप को रखा गया है।

फर्जी, सत्ता लोलुप , अहंकारी , सत्ता के दलाल संत-बाबाओं से भरी दुनिया में गंगा की अविरल धारा के लिए एक संत का भूख से मर जाना इस देश के लिए कलंक है . यह फोटो जुलाई में उनकी गिरफ्तारी का है दूसरा उनके बीमार होने पर भी अनशन का गोलोकवासी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी को सादर नमन