Home मुख्य खबरें गंगा जमुनी संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी सूफी शिक्षा: कादरी

गंगा जमुनी संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी सूफी शिक्षा: कादरी

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जयपुर। राजधानी के मोती कटला बाजार स्थित सुभाष चौक पर बुधवार रात आयोजित जश्ने गौसुलवरा में हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद कादरी को कादरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। कादरी को ये सम्मान अजमेर शरीफ दरगाह से सैयद मूगीस मियां चिश्ती और मुफ्ती ए शहर जयपुर हजरत मुफ्ती अब्दुल सत्तार रजवी के हाथों से सम्मानित किया गया।

विश्वस्तरीय संस्था सुन्नी दावते इस्लामी के तत्वाधान में आयोजित हजरत गौसे आजम शेख अब्दुल कादिर जिलानी रजियल्लाहु तआला अन्हु की याद में यह प्रोग्राम आयोजन किया गया था। जिसमें हजरत गौसे आजम रजियल्लाहु तआला अन्हु की सूफी शिक्षाओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। साथ ही उन तमाम कट्टरपंथियों का खुले लफ्ज़ों में खंडन किया जाता है जो सूफी शिक्षाओं को समाज के लिए उचित नहीं समझते।

प्रोग्राम के मुख्य वक्ता हजरत मौलाना अंसारुल कादरी फैजी ने बताया कि हजरत गौसे आजम शैख अब्दुल कादिर जिलानी वह महान संत हैं। जिन्होंने अपने जमाने में सूफी मत को को बढ़ावा दिया और सूफी शिक्षाओं को अपने अनुयायियों में जबानी तौर पर भी फैलाया और लिखित रूप में भी। आज पूरे जग में आप के अनुयाई और आप से प्रेम रखने वाले अपने आप को कादरी कहते हैं। उन्होंने बताया की सूफियों के यहां सूफी मत की शिक्षाओं के अनुसार चार महान सिलसिले राइज हैं जिनमें सिलसिला ए कादरिया सर्वप्रथम एवं सबसे महान है। इस सिलसिले के मानने वालों में पूरे जग में बहुत महान संत गुजरे हैं।

वहीं हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद कादरी ने कहा कि आज पूरे जग में अशांति फैली हुई है जिसको शांति में परिवर्तित करने के लिए सूफी शिक्षाओं का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि हमारा देश भारत पूरे जग में एक महान संस्कृति वाला देश है जिसकी गंगा जमुनी संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी है कि सूफी शिक्षाओं को सिलेबस में शामिल किया जाए। मौलाना कादरी ने नाम ले ले कर तालिबान, अल कायदा, आईएसआईएस, जैश ए मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसी उन तमाम कट्टरपंथी वहाबी ताकतों का खंडन किया जिन्होंने पूरे विश्व में अशांति फैला रखी है। मौलाना ने कहा कि जब से दुनिया सूफियों के रास्तों से अलग हुई है तब से इन कट्टरपंथी ताकतों को अपना दांव खेलने का अवसर मिला है अतः इसका इलाज भी यही है कि आज हम फिर यह हलफ उठाएं कि पूरी दुनिया में सूफी मत को आम करेंगे।

इसके अलावा मुफ्ती खालिद अयूब मिस्बाही ने कहा कि आज हम सब हजरत गौसे आजम रजियल्लाहु तआला अन्हु की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करने का पक्का इरादा करते हैं और साथ ही यह वादा करते हैं कि जो भी आपकी शिक्षाओं को फैलाने वाले हैं उनका सम्मान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा की मौलाना सैयद मोहम्मद कादरी पिछले कई वर्षों से आप रजियल्लाहु तआला अन्हु की शिक्षा का प्रचार कर रहे हैं लिहाजा इस अवसर पर हम मुफ्ती ए शहर जयपुर हजरत मुफ्ती अब्दुल सत्तार रजवी के हाथों से आपकी तथा अन्य उलेमा और इमामों की तरफ से आपको कादरी अवॉर्ड पेश करना चाहते हैं और दुआ करते हैं कि मालिक आपको इसी प्रकार अन्य काम करने की तौफीक बखशे।

देर रात तक चले इस प्रोग्राम का अंत हजरत गौसे आजम शेख अब्दुल कादिर जिलानी की शान में पढ़ी गई मनकबतों, नातों और विशेष दुआओं पर हुआ। प्रोग्राम में विशेष रूप से शहर के उलेमा और इमामों ने शिरकत की।