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महान देश की महान करतूतः 92 हजार 275 प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में सिर्फ एक अध्यापक

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सिद्धार्थ रामू

बच्चों की शिक्षा के प्रति केंद्र और राज्य सरकार है किस कदर और असंवेदनशील और उदासीन हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में 92, 275 ऐसे प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल है जहां पर सिर्फ एक अध्यापक है। यह तथ्य मानव संसाधन विकास मंत्री ने लोकसभा में स्वीकार किया। कोई भी अंदाज लगा सकता है इन स्कूलों में कम से कम 1 करोड़ बच्चे पढ़ते होंगे।

एक ही अध्यापक पहली कक्षा से लेकर पांचवी कक्षा तक और पांचवी कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाता होगा ।वह क्या पढ़ता होगा? और कैसे पढ़ाता होगा ? इसका अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है। इन स्कूलों से निकलने वाले बच्चों का भविष्य क्या होगा इसका भी अनुमान बहुत आसानी से लगाया जा सकता है। इन बच्चों के शिक्षित होने को कौन कहे, साक्षर होना भी मुश्किल है।

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है विश्व की पांच/छठी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है।विकास दर सबसे तेज है कहा जा रहा है कि बहुत जल्दी ही भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।भारत में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है लेकिन सरकारों के पास इस देश के बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक नियुक्त करने का पैसा नहीं है। यह पैसे का मामला है या गरीबों के बच्चों के प्रति उदासीनता का ? केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें इनका इस देश के आम लोगों के बच्चों से कोई सरोकार नहीं दिखाई देता।