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अगर NIA द्वारा गिरफ्तार किये गए ‘संदिग्ध’ अदालत में बेकसूर साबित हुए तो…..

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वसीम अकरम त्यागी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाक़ों से मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार किया, और बताया कि ये लोग आईएसआईएस के मॉड्यूल बना रहे थे, जांच एजेंसी ने इन लोगों के पास से असलहा भी ‘बरामद’ किया। एनआईए द्वारा बरामद किये गए असलहे में आतिशबाजी में प्रयोग किये जाने वाले सुतली बम और ट्रेक्टर का हाईड्रोलिक सुर्खियों में रहा जिसे एजेंसी ने विस्फोटक और रॉकेट लांचर बताया था। इस प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘लगता है फिर से एनआईए अपने पुराने खेल खेल रही है। बेकसूर मुसलमानों को पकड़कर आईएसआईएस का एजेंट बताकर बड़ी आतंकी साजिश कह रही है।गांव के लोगों का आरोप है कि इनके सब आईडेंटिटी कार्ड जला दिए। ट्रैक्टर के पाइप को रॉकेट लॉन्चर और लोहे के चूरे को बारूद बना दिया”’ ये सवाल प्रशांत समेत उन तमाम लोगों ने उठाऐ हैं जिनकी आंखें नफरती चश्मे से ढ़की हुई नहीं हैं।

<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en"><p lang="hi" dir="ltr">लगता है फिर से एनआईए अपने पुराने खेल खेल रही है। बेकसूर मुसलमानों को पकड़कर आईएस आईएस का एजेंट बताकर बड़ी आतंकी साजिश कह रही है।गांव के लोगों का आरोप है कि इनके सब आईडेंटिटी कार्ड जला दिए। ट्रैक्टर के पाइप को रॉकेट लॉन्चर और लोहे के चूरे को बारूद बना दिया"<a href="https://t.co/xV7e6CCKfK">https://t.co/xV7e6CCKfK</a></p>— Prashant Bhushan (@pbhushan1) <a href="https://twitter.com/pbhushan1/status/1078478424916795392?ref_src=twsrc%5Etfw">December 28, 2018</a></blockquote>
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लेकिन प्रशांत के इस ट्वीट पर जैसी प्रतिक्रियाऐं आई हैं वे बहुत ही ख़तरनाक हैं। प्रशांत के इस ट्वीट को लगभग ढ़ाई हजार लोगों ने रिट्वीट किया है और तकरीबन साढ़े तीन हजारो लोगो ने इस पर टिप्पणी की हैं, ये टिप्पणी बहुत ख़तरनाक हैं और भविष्य के हिन्दुस्तान के लिये चिंता का विषय हैं। सोशल मीडिया पर बैठे हुए कुत्सित मानसिकता के लोगों ने प्रशांत को तरह तरह की गालियों से नवाज़ा और एनआईए द्वारा गिरफ्तार किये गए लोगों को अदालत से पहले ही आतंकवादी घोषित कर दिया है। यही इलैक्ट्रॉनिक मीडिया एंव प्रिंट मीडिया ने किया है।

लेकिन सवाल वही है कि आख़िर अदालत से पहले ही किसी को भी मुजरिम करार देने का अधिकार किसी कुत्सित मानसिकता वाले मीडिया घराने को किसने दिया है ? अब तक मुस्लिम समाज के जितने लोगों को आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार किया गया है उनमें से 99 प्रतिशत अदालत से बाइज्जत बरी हुए हैं। और ये उस सूरत में हुए हैं जब मीडिया से लेकर जांच एजेंसी तक अपनी अपनी कहानी गढ़कर उन्हें खूंखार आतंकी घोषित कर चुकी थीं। ऐसा ही अब हो रहा है, जिन लोगों ने हाल ही में हुई गिरफ्तारियो पर सवाल उठाने के ‘जुर्म’ में प्रशांत भूषण को भद्दी गालियां और आतंकवाद का समर्थक करार दिया है, ये वही लोग हैं जो अफराजुल की हत्या करने वाले हिन्दुवादी आतंकी के समर्थन में रैलियां एंव जुलूस निकालते हैं, गाय के नाम पर किसी इंसान को मारने वाले दरिंदे को ‘वीर’ कहते हैं, और एक आठ साल की बच्ची को बलात्कार के बाद मार डालने वाले दरिंदो को ‘मर्द’ कहते हैं। ऐसे लोग क्या किसी आतंकवादी से कम हैं? बीते साल चार सितंबर को अजमेर दरगाह ब्लास्ट के मुजरिम भावेश पटेल को अदालत से ज़मानत मिली थी, जेल से जमानत पर छूटने के बाद जब वह अपने गृह राज्य गुजरात पहुंचा तो उस आतंकी का फूल माला पहनाकर जुलूस निकाला गया और उस आतंकवादी को ‘नायक’ की तरह पेश किया गया।

बीते कुछ बरसो से धर्म की आड़ लेकर इंसानों की हत्या करने वाले हिन्दुवादी हत्यारों का महिमामंडन करने का चलन बढ़ा है। सबसे पहले ये खेल गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के भक्तों ने शुरू किया और उसके बाद से बीते चार सालों में यह सिलसिला लगातार चलता आ रहा है। हद तो तब हो जाती है जब संवैधानिक पद पर बैठे कई माननीयों ने इन हत्यारों को महिमामंडन किया। सुरक्षा एजेंसियों की निगाह उस तरफ नही जाती या फिर सुरक्षा एजेंसी उस तरफ जाना ही नहीं चाहतीं क्योंकि उन्हें इंस्पेक्टर ‘राठौड़’ बनने का डर है, इसीलिये सुतली बम को खतरनाक विस्फोटक और ट्रेक्टर ट्रॉली के हाईड्रा को रॉकेट लांचर बताकर समुदाय विशेष को टार्गेट किया गया। लेकिन सवाल यह है कि अगर ये गिरफ्तारी नौजवान भी पांच सात साल बाद अदालत से बाइज्जत बरी हो गए तब इनके बर्बाद हुए वक्त और बर्बाद हो चुकी छवी की जिम्मेदारी कौन लेगा? देश के संविधान में वक्त बर्बाद करने के एवज़ में कोई सजा नही है, अगर संविधान में वक्त बर्बाद करने के लिये भी सजा मुकर्रर कर दी तो हो सकता है जांच एजेंसियों को शक के आधार पर किये जाना वाला फर्जीवाड़ा बंद हो।

(लेखक युवा पत्रकार एंव नेशनल स्पीक के कार्यकारी संपादक हैं)