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तो यह है एक लाख करोड़ के कर्ज में डूबी वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल से PM का संबंध, इसीलिये…

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गिरीश मालवीय

क्या न्यायतंत्र, क्या राजनीतिक दल ओर क्या मीडिया ये सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे है. तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट को दोबारा खोला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्लांट को बंद करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया है। एनजीटी ने तमिलनाडु के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन हफ्ते के भीतर कॉपर प्लांट की सहमति के नवीकरण को इजाजत देने के लिए नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया है अधिकरण ने कहा कि वेदांता अपने संचालनों के लिए बिजली का इस्तेमाल कर सकता है। कंपनी को आने वाले तीन सालों में कल्याणकारी योजनाओं पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने को कहा है। इसमें जल आपूर्ति, अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएं और कौशल विकास जैसी परियोजनाएं शामिल होंगी।

यानी 100 करोड़ रुपये देकर वेदांता को तूतीकोरिन के पर्यावरण को बिगाड़ने का हक दे दिया गया है और हा एक बात बताना तो हम भूल ही गए कि इसके अलावा वेदांता को एक समर्पित व इंटरएक्टिव वेबसाइट बनानी होगी, जहां हितधारक पर्यावरण से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, टीएनपीसीबी द्वारा अनिवार्य भूजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी कर सकेंगे और समिति के निष्कर्षो के प्रभावकारी पालन के लिए समयसीमा दे सकेंगे।

स्टरलाइट प्लांट में मार्च 2013 में गैस लीक होने से एक शख्स की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रुप से बीमार हुए थे। इस घटना के तुरंत बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने प्लांट को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन इसे फिर से शुरू कर दिया गया पिछले साल विरोध प्रदर्शन मार्च में आरम्भ हुए, जब कंपनी ने कहा कि वो अपना उत्पादन 4 लाख टन से बढ़ाकर 8 लाख टन प्रति टन कर रहे हैं। भारी विरोध और पुलिस की गोलीबारी के बाद प्लांट को 27 मार्च, 2018 को फिर से बंद कर दिया गया था।यूनिट को बंद करने की मांग को लेकर हुए उग्र विरोध-प्रदर्शन में 13 लोगों की मौत के बाद भी कंपनी अपनी क्षमता को दोगुना करना चाहती है।

जिस तरह की चालबाजी अपना कर यह प्लांट तूतीकोरिन में लगाया गया था उसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। 2006 से ही अस्तित्व में आ चुके पर्यावरण क्लियरेंस के नियम, कुछ मामलों में जनसुनवाई से छूट देते हैं. अगर एक लघु उद्योग एक ऐसे निर्दिष्ट औद्योगिक पार्क के भीतर स्थापित किया जा रहा है, जिसके पास अपना पर्यावरणीय क्लियरेंस है, तो उस खास उद्योग को लोगों से राय-मशविरा करने से छूट दे दी जाती हैं। वेदांता ने इसी छूट का फायदा उठाया ओर अपनी यूनिट राज्य इंडस्ट्रीज़ प्रमोशन कॉरपोरेशन ऑफ तमिलनाडु (एसआईपीसीओटी) औद्योगिक पार्क में स्थापित की, उसके बाद वेदांता ने 2009 में अपने कॉपर स्मेल्टर प्लांट का विस्तार करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति मांगी. उस समय यूपीए सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने जन सुनवाई की जरूरत के बगैर ही इस विस्तार को स्वीकृति दे दी. चिदम्बरम के बहुत नजदीकी सम्बन्ध इस कम्पनी से रहे हैं.

यह स्वीकृति 5 सालों के लिए वैध थी. इस मियाद की समाप्ति की तारीख नजदीक आने पर एक बार फिर 2013 में वेदांता इसे आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रालय की शरण में गयी. पर्यावरण मंत्रालय ने मई, 2014 में (यूपीए सरकार के तहत) यह आदेश दिया कि वेदांता की विस्तार योजना जैसे मामलों में लोगों से विचार-विमर्श करना जरूरी होगा.

लेकिन, दिसंबर, 2014 में एनडीए सरकार ने इस फैसले को पलट दिया और मार्च, 2015 में पर्यावरण मंत्रालय ने वेदांता का पर्यावरणीय क्लियरेंस दिसंबर, 2018 तक के लिए बढ़ा दिया. कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए और बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए दोनों लगातार सरकारें लोगों के विरोध में कंपनी के हित में लगातार काम कर रही हैं। जब 2015 में मोदी ब्रिटेन की यात्रा पर गए थे तब वेदांता ने फ्रंट पेज पर मोदी के स्वागत में पूरे पन्ने का इश्तेहार दिया था और पिछले साल भी कुछ ऐसा ही इश्तेहार कथित तौर पर वेदांता ने मोदी के स्वागत में दिया था.

दिल्ली की एक अदालत ने 28 मार्च, 2014 को भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों को वेदांता समूह की सहायक कंपनियों से विदेशी धन प्राप्त करने में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन का दोषी ठहराया था। 2013 में एक रिपोर्ट में सामने आया कि NDTV की वेदांता से एक प्रोजेक्ट को लेकर पार्टनर शिप की बात भी सामने आई थी एनडीटीवी-वेदांता ने मिलकर ‘ऑवर गर्ल्स ऑवर प्राइड कैम्पेन’ चलाया था. क्रेडिट सुईस की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 10 बड़े कर्जदारों की बात करें, इसके बाद वेदांता ग्रुप दूसरे स्थान पर है वेदांता पर सबसे ज्यादा 1.03 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है उसके बाद भी वह इलेक्ट्रोस्टील जैसी कम्पनी को खरीद लेता है तो आप खुद ही समझिए कि सत्ता में बैठे लोगों से उसका कितना गहरा गठजोड़ हैं.

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)