Home देश नज़रियाः मालूम हुआ कि देशभक्ति सत्ता और संसाधनों से जुड़ी है?

नज़रियाः मालूम हुआ कि देशभक्ति सत्ता और संसाधनों से जुड़ी है?

SHARE

हाल ही में एक इराक़ी शिया ने बताया किस तरह सद्दाम के शासनकाल में उनपर अपनी देशभक्ति साबित करने का भारी दबाव रहता था। इस पूर्व सैन्य अधिकारी के मुताबिक़ उनके साथी हमेशा उन्हें लेकर सशंकित रहते थे। तब आम सुन्नी अपने शिया और क़ुर्द भाइयों को ईरान और ख़ुमैनी के एजेंट कहते थे।


उनके मुताबिक़ सत्ता बदलने के बाद अब आम इराक़ी शिया गले तक राष्ट्रवाद में डूबा नज़र आता है। इधर देशभक्ति साबित करने का दबाव अब सुन्नी अवाम पर है। हर बम धमाके के साथ वो ये साबित करने निकल पड़ते हैं कि सऊदी अरब या तफ़कीरियों से उनका रिश्ता नहीं है। ये तब है जब सद्दाम की तरह उनपर न बमबारी करने वाला है और न फांसी पर लटकाने वाला।


मालूम हुआ कि देशभक्ति सत्ता और संसाधनों से जुड़ी है। संसाधनों पर जिसका क़ब्ज़ा है वो उनको बचाए रखने की फिक्र करता है। बी-ग्रेड सिटिज़नशिप, सड़ी गली ज़िंदगी जीने वालों या क्लास फोर के काम करने वालों से आप उम्मीद करें कि वो आपसे आगे बढ़कर जंग लड़ें तो अहमक़ाना बात ही होगी। संसाधनों में बराबरी न सही लेकिन चौकीदारी में तो मौक़ा दीजिए… फिर देखिए, ये जिन्हें आप जयचंद और ग़द्दार कह रहे हैं, आपसे आगे बढ़कर दुश्मन से न लड़ें तो कहना।

जैसे सद्दाम के शासनकाल में इराक़ी शिया सैनिक 8 साल शिया ईरान से लड़े… और जैसे इराक़ी सुन्नी मोसल में और सीरियाई सुन्नी सैनिक अलप्पो और दरा में आईएसआईएस से जूझे। देशभक्ति साबित करने का दबाव बनाने भर से काम नहीं बनता है, मानसिक तौर पर बराबर भी मानना पड़ता है और मौक़े भी देने पड़ते हैं। अपने घर में अब्दुल हमीद चाहिए तो सेना तक जाने लायक़ तो बनाइए…भैया पंचर वाले आपके साथ नारे लगा सकते हैं, लड़ने नहीं जा सकते।

मोबइल पर नेशनल स्पीक की एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिये यहां क्लिक करें